पहाड़ की चुप्पी:एक साहित्यिक कहानी
पहाड़ के उस पार बसे छोटे-से गाँव में राघव का बचपन बीता था। उसके लिए पहाड़ कोई आश्चर्य नहीं था। वह उसकी सुबहों का हिस्सा था, जैसे आँगन में तुलसी का पौधा, घर के पीछे बहती पतली-सी धारा और शाम को लौटते पक्षियों का शोर। बचपन में उसकी माँ कहा करती थी, “बेटा, पहाड़ केवल धरती का ऊँचा हिस्सा नहीं होता। वह अपने भीतर न जाने कितने जीवन सँभालकर रखता है।” राघव उस समय माँ की बात सुनकर हँस देता। ...