आओ नेतृत्व करे
रूपाली चिल्लाते हुए - मां मेरा नाश्ता कहां है। मां - अभी लाती हूं। रूपाली कुछ सोचते-सोचते टीवी ऑन कर देती है। रुपाली के चाचा - क्या बेटा कॉलेज जा रही हो? रूपाली - हां चाचा जी कॉलेज जा रही हूं। टीवी पर न्यूज़ आते रहता है। राजनीति कितनी गंदी हो गई है न चाचा जी? नहीं बेटा, यह तो शुरू से ही गंदी थी, बस लोगों के देखने का नजरिया है। अच्छा, नहीं पहले तो ऐसे-ऐसे संवाद नहीं बोले जाते थे। मर्यादाओं का ध्यान रखा जाता था लेकिन आजकल तो इतनी गंदी बातें बोली जाती हैं कि मन करता है न्यूज़ चैनल चेंज कर दूं। हम लोग क्या उम्मीदें करते हैं और क्या देखते हैं समाज में, अजीब लगता है। चाचाजी - नहीं बेटा ऐसा नहीं है। पहले भी चीजें ऐसी थी। राजनीति में चीजें अच्छी और बुरी दोनों दो तरह की हैं। लोग बस फेमस होना चाहते हैं सोचते हैं जितना ज्यादा चेहरा चमकेगा उतना ही मुझे फायदा होगा। इसीलिए अच्छे से अच्छे लोग भी कभी-कभी ऐसी बातें बोल देते हैं जिस पर वाद-विवाद और चर्चा-परिचर्चा होने लगती है। पहले भी ऐसी चीजें थी लेकिन आजकल सोशल मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कारण यह इतनी...