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Showing posts from August 26, 2018

नई पीढ़ी-पुरानी परंपरा

                        नई पीढ़ी - पुरानी परंपरा                 किसी जंगल में एक शेर रहता था। उसका नाम जब्बा था। वह दिन-रात यही सोचता कि काश! सारे जानवर खुद-ब-खुद मेरे पास आ जाते तो कितना अच्छा होता? जिस दिन जिस जानवर को खाने का मन होता उसे खाता। मुलायम-मुलायम खरगोश, हिरन। मगर इन सबों को खाने में मेरी तो जान ही निकल जाती है। फिर मन में सोचता है – मैं अभी जवान हूँ, खरगोश कि क्या मजाल मैं तो हिरन भी पकड़ कर खा सकता हूँ। लेकिन जब मैं बूढ़ा हो जाउंगा, तब मेरा क्या होगा? मुझे इस जवानी में ही सोचना होगा कुछ उपाय। जब्बा शेर सारे जानवरों कि बैठक बुलाता है। उस जंगल के सभी जानवर बैठक में शामिल होते है।                  जब्बा शेर सभी जानवरों को संबोधित करते हुए – मुझे लगता है कि जंगल की व्यवस्था ठीक नहीं है। सभी जानवर सहमति भरते हुए – हां!हां!हां! जब्बा शेर – कोई किसी को कभी भी, कहीं भी खा जाता है यह कहां तक सही है? यह कहां तक सही है? एक बूढ़ा लोमड़ी ...

एक सवाल : जो जिंदगी बदल दे

                    एक सवाल: जो जिंदगी बदल दे   एक राजा था। राजा रोज सोचता था कि उसके मरने के बाद क्या होगा? वह कहाँ जाएगा? एक दिन राजा अपने दरबार में सभी ऋषि-मुनियों को बुलाता है और उनके सामने यह प्रश्न रखता है कि मरने के बाद भी जीवन है या नहीं ? उनका क्या होता है, जो मर जाते हैं? सभी विद्वानों में एक हलचल-सी मच जाती है। एक विद्वान खड़ा होकर महाराज- आपके मन में यह सवाल क्यों आया? आपकी तबियत तो ठीक है न? राजा-मैं बिल्कुल ठीक हूँ, मुझे सिर्फ इस प्रश्न का जवाब चाहिए बस! सभी विद्वान अपने-अपने तरीके से जवाब देते है। मगर राजा किसी के जवाब से संतुष्ट नही होता। कुछ विद्वान कहते है- मरने के बाद लोग स्वर्ग मे जाते। कुछ विद्वान कहते है स्वर्ग जैसी कोई च़ीज ही नहीं होती। और इस बात पर ही तर्क-वितर्क होने लगता है। राजा सोचता है कि जब यह बात एक-दुसरे को ही नहीं समझा पा रहे है स्वर्ग है या नहीं, मरने के बाद जीवन है भी या नहीं तो ये मुझे क्या समझाएंगे? विद्वानों में एक लंबा तर्क-वितर्क चलने लगता है। राजा गुस्सा जाता है– मैंने आपलोंगो को यहां शास...

आज की लड़की ( फिर वही समस्या )

                        आज की लड़की                      (फिर वही समस्या)         आज सुबह घर में कोहराम मचा हुआ था। मेरा भाई चिल्ला रहा था। माँ भी कुछ बोल रही थी। मैंने पुछा-क्या हुआ? माँ-तू चुप रह! क्यों? कोई बताएगा क्या हो रहा है? दस लोग दस तरह कि बातें करते हैं और तुम्हें इसमें पड़ने कि जरूरत नहीं। पुजा को समझते देर न लगी, मेरे बारे में बात हो रही है। उसका भाई रोहन(चिल्लाते हुए)-हां! तेरे बारे में ही हो रही है। इतना स़ज-सवर के बाहर जाने कि जरूरत हीं क्या है? दस लोग मुझे मिल जाते हैं सुनाने के लिए। लड़की हो लड़की की तरह रहो, लड़का बनने की जरूरत नहीं। उसकी माँ रोहन को बिच में काटते हुए-पहले अपनी बहन से तो पूछ क्या हुआ है? ऐसे ही आकर चिल्लाना शुरू कर देता है। लोगों का तो काम ही है एक-दुसरे को भड़काना। पुजा-मैंने किया क्या है? रोहन-यही बात तो मैं तुमसे पूछने वाला था, तुने किया क्या है? पुजा-कब? रोहन-कल। पुजा - गली-मोहल्ले के लड़के मेरी दोस्त नेहा पे फब...