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Showing posts from September 16, 2018

मेरी यादों में तुम

खुद में देखती थी सारी दुनिया तोड़ती थी सारे रस्मों-रिवाजों को कहां बांध पाती थी मां मुझे नील गगन में उड़ती थी टुक-टुक निहारती तुम्हारी प्यारी आंखें उठते गिरते कदमों से ठुमक-ठुमक कर आना तुम्हारा मेरे पास लोटते-पोटते बदन से तेरा इठलाना कितना मनोरम लगता है अब बन गया मेरे जीवन का सार ना तो मुझे आंखें दिखाता है ना ही रस्म-रिवाज समझता है फिर भी खुद को बांधती हूं बंधनों में तू बांधता है मुझे उम्मीदों में तू भटकता है अपने सपनों में मैं भटकती हूं तुम्हारी यादों में तूने ही सिखलाया है जीवन की सच्चाई मैं कुछ नहीं तुम्हारे बिना तू सब कुछ मेरा देखती थी दुनिया हमें अलग-अलग तूने बतलाया दुनिया को हम एक हैं तू आधा सरोज तू आधा मानसी है तू पूरा हनी है।

एक ऐसा भी प्रयास

           कितनी सुहानी रात है। तारे टिमटिमाते हुए कितने अच्छे लगते हैं दीपाली के खुले बाल और उसकी दिलकश आंखें कितना मदहोश कर रहा था करण राज को। करण दीपाली से-आज तो तुम  गजब ढाह रही हो। दीपाली शरमाते हुए-मैं झूठ नहीं बोलूंगी। करण दीपाली से- सच ही बोल दो। दीपाली-अब तुम पहले जैसे नहीं रहे। करण दिपाली को अपनी बाहों में भरते हुए-क्या बात करती हो जान! कल भी मैं तुम्हारे लिए पागल था और आज भी हूं। दीपाली मुंह चिढ़ाते हुए-कल भी तुम अपने काम के लिए पागल थे और आज भी। करण-कहना क्या चाहती हो तुम? मैं तुम्हें प्यार नहीं करता? दीपाली-प्यार का मतलब समझते हो तुम? करण-ये बात है, तो तुम ठीक ही कहती हो। 10 साल अपने पीछे घुमाने के बाद शादी की हो और तुमसे प्यार ही नहीं करता। दीपाली खुद से ही शर्मा जाती है। दीपाली-नहीं-नहीं ऐसी बात नहीं! आजकल तुम सिर्फ अपने काम पर ध्यान देते हो। तुम्हें नहीं लगता हमें एक ब्रेक के जरूरत है। करण-ये बात तो तुम ठीक कहती हो, लेकिन क्या करूं तुम चाहती थी कि मैं UPSC करूं तो अब झेलो। दीपाली-इसका मतलब ये थोड़ी है कि तुम मुझसे प्यार न करो। जितने भी...