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Showing posts from October 21, 2018

दोस्ती में ज़हर

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         रूपा और अर्चना दो दोस्त रहती है। रूपा आगे पढ़ाई नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसकी family उतनी पढ़ी-लिखी नहीं थी। अर्चना आगे पढ़ना चाहती थी क्योंकि family चाहती थी कि वो आगे पढ़े। अर्चना सोचती थी कि अगर रूपा भी उसके साथ पढ़े तो बेहतर होगा नहीं तो उसे अकेले ही जाना पड़ेगा कॉलेज। इसलिए अर्चना ने रूपा      और उसके परिवार को काफी समझाया था आगे पढ़ाई करने के लिए। रूपा के पिताजी तो मान गए थे इस चीज़ के लिए लेकिन रुपा की मां तैयारी नहीं हो रही थी। उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कह दिया था रूपा को – मैट्रिक कर ली हो शादी हो जाएगी। घर के काम का सीख लो यही आगे काम देगा, नहीं तो तेरी दुर्गति हो जाएगी। जब देखो पढ़ाई! पढ़ाई! पढ़ाई! अरे! पढ़-लिख के कलेक्टर बनना है तुमको का। तुमको पढ़ाई करनी है तो कर लेकिन मेरे घर के काम में एक भी बाधा हुई तो मैं उसी दिन तुम्हारी किताबों को जला दूंगी।           रूपा इन सब बातों को सुनने कि अभ्यस्त थी इसीलिए उसे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा लेकिन अर्चना को काफी बुरा लग रहा था। अर्चना को अजीब लग रहा ...

संस्कार

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                      दो कौवे आपस में बात कर रहे थे पता है आजकल कोयलों का आतंक है। जब देखो हमारे घोसले में अपने अंडे देकर चली जाती है। उसके अंडों को हम लोग अपना अंडा समझ कर सेते रहते हैं। वही बच्चें बड़े होकर हमारे बच्चों को मार देते है। दूसरा कौआ – नहीं-नहीं ऐसा नहीं है, अगर हम उन्हें अच्छे संस्कार देकर बड़ा करते तो क्या ऐसा होता? संस्कार ही तो सबसे बड़ी चीज होती है, शायद हम बच्चों को सेते समय ज्ञान परक वाली कहानियां सुनाएं तो हमें उनके और अपने अंडे में फर्क करने की जरूरत ही ना पड़े? संस्कार उन्हें हमारे बच्चों की रक्षा करने के लिए आगे बढ़ाएगा। पहले कौवे को दूसरे कौवे कि बात पसंद आ जाती है। पहला कौआ – तुम्हारी बात में दम है लेकिन आखिरकार है तो कोयल की ही औलाद। कोयल अपना कुछ ना कुछ अंश तो उसमें छोड़ ही देगी। दूसरा कौवा पहले कौवे से – गुण किसी का भी हो लेकिन संस्कार तो उसमें डाले ही जा सकते हैं। जन्म देने वाले से ज्यादा महान पालने वाला होता है। उसेसे भी ज्यादा महान शिक्षा देने वाला होता है अगर सही तरीके से शिक्षा दी जाए कोयल के ब...