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Showing posts from November 18, 2018

अपनी इच्छा शक्ति से बदल दो अपना भविष्य

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               समीरा सुबह-सुबह सनोज के लिए चाय बना रही थी। चाय कि प्याली सनोज के सामने रखते हुए – तुम्हें नहीं लगता हम लोगों को बच्चों को कॉन्वेंट स्कूल में डालना चाहिए? कब तक ले वह हिंदी मीडियम में पढ़ते रहेंगे? मुझे नहीं लगता इससे उनका कुछ भविष्य बनने वाला है। तभी सनोज समीरा को आंखें दिखाते हुए बोलता है – तुम्हें क्या लगता है मैं दिन रात घर में बैठा रहता हूं? बाहर जाता हूं, काम करता हूं। सौ खर्चें है।  उस पर से कॉन्वेंट का खर्चा, मुझे नहीं लगता मैं निकाल पाऊंगा। ये मुझसे अभी फिलहाल तो नहीं होनेवाला है। जैसे पढ़ रहा है पढ़ने दो, अभी छोटे ही तो है। धीरे-धीरे मैं कुछ जुगाड़ कर लूंगा तो उन्हें कान्वेंट में डाल दूंगा। तुम्हारी सुबह चाय के साथ यह बकवास मुझे पसंद नहीं है। तुम क्या चाहती हो? मैं एक दिन घर छोड़ कर चला जाऊंगा। तुम्हें क्या लगता है यह बच्चा मेरा नहीं है। तुम्ही उनकी मां हो? मैं उनका पिता नहीं हूं? जो रोज-रोज हर दिन मुझे यह ताने मारते रहती हो। कुछ नहीं होगा, कुछ नहीं होगा। अगर तुम्हारा यही रवैया रहा तो मुझे लगता है, सच में जिंदगी में ...