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Showing posts from December 2, 2018

खुद में संपूर्ण

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              आनंद और समीर दो सगे भाई थे। दोनों एक-दूसरे से एकदम अलग। समीर पढ़ाई में तेज़ था वह सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ही ध्यान देता था। समीर हमेशा अपने क्लास में अव्वल आता था लेकिन आनंद, आनंद अपने पिता के कामों में हाथ बंटाता था वह पढ़ने में कमजोर था और पढ़ने से हमेशा जी चुराता था। आनंद हमेशा सोचता था मैं ऐसा क्या करूं जिससे मुझे पढ़ाई ना करनी पड़े। उनके पिताजी कभी कुछ नहीं कहते ना हीं समीर  कि ज्यादा तारीफ करते हैं ना ही आनंद की बुराई। दोनों बेटे उनके लिए समान थे।             एक बार की बात है जब दोनों भाई क्लास में थे तभी शिक्षक आनंद से – तुम हमेशा क्लास में सोते रहते हो। कोई काम ठीक से नहीं करते, पढ़ते भी नहीं हो। अपने ही भाई समीर को देखो वह कितना अच्छा है। मन लगाकर पढ़ाई करता है। एक तुम हो कि हमेशा मटरगश्ती कि सोचते रहते हो और कोई दूसरा काम आता है भी है तुम्हें? आनंद चुपचाप खड़ा रहता है फिर उसके मास्टर जी – समीर जिंदगी में जरूर कुछ अच्छा करेगा। मुझे लगता है तुम्हारे पिताजी तुम पर पैसे बर्बाद कर रहे है। जब तुम्ह...

हिन्दू मुस्लिम कि लड़ाई में इंसानियत कि जीत

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              जोरों की हवा चल रही होती है। तूफानी हवा जिसके कारण दरवाजे और खिड़कियां आपस में टकरा रहे थे। शबाना बेगम अपनी औलाद खालिद से – देख न तेरे अब्बू अब तक नहीं आए? खालिद दौड़ कर आता है। क्या हुआ अम्मी कुछ कह रही थी क्या? हवा काफ़ी तेज है। शबाना – सुना नहीं! मैंने कहा तेरे अब्बू अब तक नहीं आए। खालिद – हां अम्मी, मैं भी ते को यही बोलने वाला था। अब्बू कब गए थे? शबाना – जाकर बाहर देखेगा भी, अल्लाह सब खैर-खिदमत रखें, या-अल्लाह जिन की औलाद सारे सवाल अभी ही कर लेगा? मुझे तेरे अब्बू की बहुत चिंता खाए जा रही है। खालिद अपने अब्बू को देखने बाहर चला जाता है।         नूरजहां चौक पर जाते ही उसे पता चलता है कि ट्रक पलट गई है। खालिद थोड़ा घबरा जाता है और आस-पास के लोगों से पूछता है – कब पलटी थी? भीड़ में से एक आदमी बोलता है – शाम में ही। और मेरे अब्बू को कहीं देखा है क्या? हां! तेरे अब्बू उस ट्रक में से आदमी को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। इतनी तेज तूफान में भी? शैतान उनके दिमाग में घुस गया है क्या? खालिद वही से बैरंग अपने घर वापस...

एक मासूम सवाल

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           किसी जंगल में जब्बू नाम का शेर था। वह काफी बहादुर और हिष्ट पुष्ट रहता है।  सभी जानवर उसकी बहुत इज्जत करते थे। जब्बू का एक बेटा भी था उसका नाम वह बड़े ही प्यार से रखता है जब्बा। जब्बा भी अपने बाप कि तरह खूबसूरत था उसकी प्यारी प्यारी आंखें थी और वह अपने बाप की तरह ही हिष्ट पुष्ट था। जब्बा हमेशा जब्बू से एक ही सवाल करता पिताजी मैं कैसे सफलता प्राप्त करूंगा? मैं आपकी तरह एक सफल शेर बनना चाहता हूं। आप की तरह आप की तरह बहादुर। आपकी तरह साहसी आपकी तरह हमेशा सही है निर्णय करने वाला। बिल्कुल आपकी तरह। जब्बु - देखो बेटा  तुम्हारा नाम जब्बा इसलिए रखा है क्योंकि मुझे पता है तुम सबसे बहादुर हो। हर प्राणी खुद में ही स्पेशल है हर प्राणी एक-दुसरे से एकदम अलग है। इसीलिए तुम्हें किसी और की तरह बनने की जरुरत नहीं है तुम जब्बा हो और जब्बा की तरह बढ़ो जब्बू बनने की जरुरत नहीं है।              जब्बा कहां जब्बू कि सुनने वाला था वह हमेशा जब्बू  के आगे-पीछे घूमते रहता था। यह कारण है कि उसे कोई दोस्त नहीं बन पाते हैं...