राही और रास्ता
यूँ घूरती है तुम्हारी नज़रे मुझको मेरे होने का एहसास होता है दूसरो कि नज़रे यूँ घूरती है तुमको तुम्हें खोने का एहसास होता है। तब तुम मुझे एहसास दिलाते हो मैं क्या हूँ तुम्हारे लिए जीवन सार्थक लगता है, तुम्हारे कारण तब दूसरे एहसास दिलाते है मैं कुछ नहीं, तुम सबकुछ हो। मेरा अस्तित्व कुछ नहीं तुम्हारे बगैर जैसे तारों का अस्तित्व नहीं है रात के बगैर जैसे दिये का अस्तित्व नहीं है बात्ति बगैर। मैं खुद को ढूंढने लगती हूँ तुम्में तब तुम मुझे बताते हो तुम सूरज हो दिन का अस्तित्व नहीं, तुम्हा...