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Showing posts from September 2, 2018

राही और रास्ता

यूँ घूरती है तुम्हारी नज़रे मुझको मेरे होने का एहसास होता है दूसरो कि नज़रे यूँ घूरती है तुमको तुम्हें खोने का एहसास होता है।                तब तुम मुझे एहसास दिलाते हो                मैं क्या हूँ तुम्हारे लिए                जीवन सार्थक लगता है, तुम्हारे कारण                तब दूसरे एहसास दिलाते है                मैं कुछ नहीं, तुम सबकुछ हो। मेरा अस्तित्व कुछ नहीं तुम्हारे बगैर जैसे तारों का अस्तित्व नहीं है रात के बगैर जैसे दिये का अस्तित्व नहीं है बात्ति बगैर।                मैं खुद को ढूंढने लगती हूँ तुम्में                तब तुम मुझे बताते हो                तुम सूरज हो                दिन का अस्तित्व नहीं, तुम्हा...

हर-हर मोदी घर-घर मोदी

              हर-हर मोदी घर-घर मोदी हर-हर मोदी घर-घर मोदी का नारा लेकर आया सामने वह फरिश्ता बनकर दिखाए सपने प्यारे-प्यारे मन में जगाए ज्ज़बात और उमंग             पंद्रह लाख हर खाते मे आएगा             मिलेगा हर साल रोज़गार युवाओ को             हम खुशी से झूम रहे थे             नाच रहे थे गा रहे थे             हर-हर मोदी घर-घर मोदी हर खाते का पैसा गूल हर खाते का पैसा गूल ले गया नीरव मोदी हम करते रह गए हर-हर मोदी घर-घर मोदी            वह सीना ताने कहता था            हमें प्रधानमंत्री नहीं चौकिदार बनाइए            हम पाकिस्तान का एक नहीं दस सर काटेंगे            56 इंच का सीना दिखाता क्या उलटफेर खूब दिखाया पाक मे जा के केक खाया हम कहते रह गए हर-हर मोदी घर-घर मोदी ...

नारी कि आवाज़

              नारी कि आवाज़ खुद को ढूंढती हूँ मैं या ढूंढती है दुनिया मुझमें खुद को अगर मैं न रहूँ तो ये दुनिया ही न रहे ये दुनिया है तो इस दुनिया में मेरा अस्तित्व ही खो गया है कहीं जो माँ कभी दूलारती थी मुझे आज वही आँख दिखाने लगी है इस यौवन पे कदम क्या रखा मैंने बदलते बचपन कि तरह बदल गयी दुनिया मेरी सपनों भरी आँखें मेरी निल गगन को छूने चली बाँधती पैरों मे जंजीरे मेरी मर्यादा आई थी अकेली इस दुनिया मे जाऊँगी भी अकेली मुझे क्या खबर थी की मेरे जन्म से पहले ही मर्यादा कि माला ये दुनिया पहना देगी मुझे एक दर्द है मेरे सीने मे एक हूक सी उठती है कुछ ख़्वाहिशे है जो दम तोड़ रही है एक आह! निकल रही दिल से कोई तो आकर बचा ले मुझे हिना की तरह पिस जाना ही है मेरी जिंदगी कहती है दुनिया इसलिए रिति-रिवाज़ो मे बाँधती है दुनिया मैं खुद को मिटा दूं या मिटा दूं दुनिया के रस्म – रिवाज़ो को झकझोरती है मेरी आत्मा मुझे चल उठ खड़ा हो टूट नहीं सकती तू बिखर नहीं सकती तुने बनायी है ये दुनिया इस दुनिया ने तुम्हें नहीं बनाया तुम्हें चलते रहन...

खुशी की तलाश

                                              खुशी की तलाश                लोमड़ी और हिरण दोनो पक्के दोस्त थे। पूरे जंगल मे उनके दोस्ती कि चर्चा सबके जूबां पर थी। एक दिन लोमड़ी हिरण से-काश! उस दिन जंगल मे आग न लगी होती तो आज मैं अपने पूरे परिवार के साथ होता। हिरण-क्यों दुःखी होते हो लोमड़ी भाई मैं भी तो आपके साथ हूँ। लोमड़ी-परिवार कि बात ही अलग है। हिरण-मैं भी तो आपका परिवार ही हूँ। लोमड़ी-नहीं यार! परिवार उसको नहीं कहते तुम तो मेरे दोस्त हो। अभी मेरी माँ-बहन रहती तो कहां हूँ? कैसे हूँ? चिंता करती। अभी मैं आवारा कि तरह घूम रहा हूँ। हिरण दुःखी हो जाता है। लोमड़ी से-आपको क्या लगता है मैं आपकी परवाह नहीं करता? लोमड़ी-तू क्यों दु:खी होता है मैंने कब कहा तू मेरी परवाह नहीं करता। पूरे जंगल में तू ही तो मेरा अपना है। इसलिए तो मैं तुमसे अपने दिल की बात कह रहा हूँ। हिरण-जिस बात को लेकर आप इतने दुःखी हैं, आप सोचते है! परिवार कितना तंग करता है?...