आधुनिक युग में रिश्तों पर टेक्नोलॉजी का प्रभाव
स्नेहा और सूनील दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। स्नेहा – क्या कर रहे हो? कुछ नहीं, बस यूं ही कुछ काम कर रहा हूं। स्नेहा - दिन-रात तो काम ही करते रहते हो, कभी मेरी तरफ़ भी तो देखा करो। सूनील – यार अगर काम नहीं करूंगा तो पैसे कहां से आएंगे और पैसे नहीं रहेंगे तो घर कैसे चलेगा? स्नेहा चिढ़ जाती है और चुपचाप रसोईघर में चली जाती है। रसोईघर का काम खत्म करके फिर से सूनील के पास – क्या हो रहा है? सूनील – एक बार तो बताया न काम कर रहा हूं। स्नेहा – मेरा काम तो खत्म हो गया और तुम्हारा कैसा काम है जो खत्म ही नहीं हो रहा है? सूनील स्नेहा को चिढ़ाते हुए – हां! तुम्हारा काम तो खत्म हो गया, पर तुम्हारे नखरें तो खत्म नहीं होते। उसे पूरा करने के लिए मुझे काम करना पड़ता है। Please जाओ और मुझे तंग मत करो। स्नेहा कुछ नहीं बोलती चुपचाप बिस्तर पर चली जाती है। स्नेहा एक बार फिर से सूनील को देखती है लेकिन उसकी आंखों में कोई प्यार नहीं रहता है। स्नेहा सूनील को देखकर भी न देखने का बहाना करते हुए अपनी आंखें बंद क...