एक नया आग़ाज
हम तो उनसे अपने दिल का हाल बयां कर रहे थे उन्होंने कलम उठाई और कविता लिख डाली यूं कह दो कि दिल के जख़्मों को एक साथ उन्होंने रख दिया हम भूल जाना चाहते हैं सबकुछ उन्होंने हर जख़्म को हरा कर दिया सूना था लोग कहते है सपने टूटते है, दिल टूटते है, ख्वाब टूटते है आज तो रिश्ता भी टूट गया देखा है बहुत कुछ बिखरते मैंने सबकुछ समेटने कि चाह में कहीं सूना था मैंने सबके मन से चलो तो रिश्ते में मिठास रहती है सबके साथ चलके देखा तो आज मेरे ही जीवन में कड़वाहट भर गई है पिछे मुड़ के देखने कि चाह नहीं आगे बढ़ने कि हिम्मत नहीं मुझमें शायद बसंत आयी, फुल खिले और झड़ गए कुछ नहीं है बाकी, खत्म होने के लिए सब कुछ खत्म हो गया है लेकिन मरने के बाद ही दूसरा जीवन मिलता है अब जीऊंगी अपनी इच्छाओं से बहुत बन लिए लकिर का फकीर अब लकिर भी मेरी और क़िस्मत भी मेरी जीवन भी मेरा और फैसला भी मेरा ये ज़ीदगी एक बार मिलती है बहुत जी लिया दूसरो की शर्तों पे अब जीना है अपने शर्तों पे अब नहीं रोकेगा कोई बंधन मुझे ना ही रिश्तों में उलझेंगे सपने मेरे बहुत रह लिया घूँघट में अब घूँघट उतार के जाना ह...