मरता गर्भ
मरता गर्भ सोनल-आज बहुत अच्छा लग रहा है न ! एक अजीब-सी खुशी महसूस हो रही है। काश! हम ये बच्चा पहले ही प्लान किए होते। साहिल (अपनी टाई ठिक करते हुए) -क्या बात कर रही हो? हमने कितने मजे किए हैं। सोनल- तुम नही समझ सकते एक माँ बनना क्या होता है? ओह! हो! मेरी जान क्या तुम समझ सकती हो एक बाप बनना क्या होता है? साहिल कि माँ (इंद्रावती शर्मा)-तुम दोनों समझ सकते हो एक दादी बनना क्या होता है? मैं तो कब से कह रही हूँ कि एक मुन्ना कर लो। पहले के ज़माने में तो भगवान से झोली भरने कि दुआंए कि जाती थी, अब के जमाने मे तो बच्चों का दिमाग ठिकाने आ जाए इसकी दुआंए करनी पड़ती हैं। चलो! जो हुआ सो हुआ अब अपना ख्याल रखों। अब तुम अकेली नहीं हो, तुम्हारे अंदर कोई है। हमारे खानदान की शान। जो हमारी पीढ़ी को आगे बढ़ाएगा। सोनल साहिल को मुंह चढ़ाते हुए इशारे करती है। साहिल-माँ तुम रहने भी दो तुम बात को कहां से कहां ले जाती हो। इंद्रावती -हां भाई हां तुम दोनों ही सही, अब तुम दोनों ...