एक मासूम सवाल

           किसी जंगल में जब्बू नाम का शेर था। वह काफी बहादुर और हिष्ट पुष्ट रहता है।  सभी जानवर उसकी बहुत इज्जत करते थे। जब्बू का एक बेटा भी था उसका नाम वह बड़े ही प्यार से रखता है जब्बा। जब्बा भी अपने बाप कि तरह खूबसूरत था उसकी प्यारी प्यारी आंखें थी और वह अपने बाप की तरह ही हिष्ट पुष्ट था। जब्बा हमेशा जब्बू से एक ही सवाल करता पिताजी मैं कैसे सफलता प्राप्त करूंगा? मैं आपकी तरह एक सफल शेर बनना चाहता हूं। आप की तरह आप की तरह बहादुर। आपकी तरह साहसी आपकी तरह हमेशा सही है निर्णय करने वाला। बिल्कुल आपकी तरह। जब्बु - देखो बेटा  तुम्हारा नाम जब्बा इसलिए रखा है क्योंकि मुझे पता है तुम सबसे बहादुर हो। हर प्राणी खुद में ही स्पेशल है हर प्राणी एक-दुसरे से एकदम अलग है। इसीलिए तुम्हें किसी और की तरह बनने की जरुरत नहीं है तुम जब्बा हो और जब्बा की तरह बढ़ो जब्बू बनने की जरुरत नहीं है।
             जब्बा कहां जब्बू कि सुनने वाला था वह हमेशा जब्बू  के आगे-पीछे घूमते रहता था। यह कारण है कि उसे कोई दोस्त नहीं बन पाते हैं। हमेशा हुआ अपने पिता के साथ जंगल में घूमता रहता था।
           जब्बू जब्बा के इस तरह के हरकत से बहुत परेशान रहता है वह सोचता है अगर यह इसी तरह अपने उम्र के बच्चों से दूर रहा तो वह अपनी उम्र के बच्चों जैसा नहीं रहेगा। उसके व्यवहार से बहुत परेशान रहने लगा।
       एक दिन जब्बू जब्बा को बुलाता है - बेटा तुम्हें मुझसे क्या जानना है? मैं हर वो चीज़ तुम्हें सिखाऊंगा। जब्बा – पिताजी मुझे सिर्फ एक सवाल का जवाब दे दीजिए और मैं कुछ नहीं चाहता। जब्बू – बताओ कौन-सा सवाल है तुम्हारे अंदर जानने के लिए? तुम अपनी उम्र से इतने बड़े हो गए हो।
        पिताजी मैं चाहता हूं कि आपकी तरह एक साहसी शेर बनूं। आपकी तरह एक अच्छा राजा बन सकूं। अपनी सफलता का राज बताइए?
        जब्बू कुछ समझ नहीं पाता कि मैं इसे क्या बोलूं? फिर वह बोलता है – ठीक है मैं दो दिन बाद मैं तुम्हें सिखाऊंगा।
        जब्बा बहुत खुश रहता है। वह अपने सारे दोस्तों के पास जाकर ढ़िनढ़ोरा पिटने लगता है – पता है! मैं एक सफल शेर बनने वाला हूं। मैं एक सफल राजा बनूंगा क्योंकि मेरे पिता एक चीज देने वाले हैं जो किसी को नहीं पता। आज वह च़िज मुझे दे देंगे जिससे मैं सफल राजा बनूंगा। सभी दोस्त उसका उपहास करने लगते हैं। वो सोचते हैं यह पगला गया है। कोई ऐसी यंत्र या जादूई छड़ी थोड़ी है जिससे यह अभी के अभी होशियार हो जाएगा। आखिरकार है तो यह मूर्ख ही न।
       दो दिन बाद जब्बू जब्बा को बुलाता है – ठीक है बेटा मेरे साथ चलो मैं तुम्हें वो चीज़ देता हूं जिससे तुम एक सफल शेर बन सकते हो। दोनों वहां से निकल जाते हैं। जब्बू जब्बा को ले जाकर एक गूफा में बंद कर देता है। जब्बा वैसे ही बिना कुछ खाए-पिए पांच दिनों तक उसी गूफा में बंद रहता है। उसे लगता है अब उसकी जान निकल जाएगी।
        पांच दिनों के बाद जब जब्बू जब्बा को बाहर निकालता है तब जब्बा बिना पिता से कुछ कहे-सुने सबसे पहले दौड़ते हुए अपना शिकार ढ़ूंढ़ता है और बिना पिता से कोई ताल्लुकात रखे। जब्बू भी जब्बा के पिछे-पिछे जाता है। देखता है जब्बा कहीं इधर-उधर नहीं जाता। जब्बा का ध्यान इस बात पर भी नहीं रहता कि उसके पिता सामने ही खड़े हैं। वह अपने शिकार को चप-चप खाने लगता है। जब्बू भी जब्बा को कुछ नहीं कहता। आराम से बैठकर उसे शिकार खाते देखते रहता है।
         पेट भरने के बाद जब्बू के पास जाता है – पिताजी आपने मुझे क्यों बंद कर दिया था? मेरी तो भूख के मारे जान ही निकल रही थी लेकिन अब मुझे अच्छा लग रहा है। जब्बू – बेटा जिस प्रकार तुम्हारी भूख के मारे जान निकल रही थी उसी प्रकार सफल राजा बनने के लिए अपना लक्ष्य तय करो और लक्ष्य प्राप्ति तक तुम्हें उसी प्रकार तड़पना चाहिए जिस प्रकार भूख से तड़प रहे थे। जिस निष्ठा से तुमने यह शिकार किया है अगर उसी निष्ठा से अपनी जिंदगी के लक्ष्य को पूरा करना चाहोगे तो तुम एक सफल राजा बनोगे। जब्बा अपने पिता की बात समझ जाता है और वहां से जब्बू के साथ वापस अपने घर आकर दोस्तों के साथ खेलने लगता है।

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