एक सवाल : जो जिंदगी बदल दे

                    एक सवाल: जो जिंदगी बदल दे 
एक राजा था। राजा रोज सोचता था कि उसके मरने के बाद क्या होगा? वह कहाँ जाएगा? एक दिन राजा अपने दरबार में सभी ऋषि-मुनियों को बुलाता है और उनके सामने यह प्रश्न रखता है कि मरने के बाद भी जीवन है या नहीं ? उनका क्या होता है, जो मर जाते हैं? सभी विद्वानों में एक हलचल-सी मच जाती है। एक विद्वान खड़ा होकर महाराज- आपके मन में यह सवाल क्यों आया? आपकी तबियत तो ठीक है न? राजा-मैं बिल्कुल ठीक हूँ, मुझे सिर्फ इस प्रश्न का जवाब चाहिए बस! सभी विद्वान अपने-अपने तरीके से जवाब देते है। मगर राजा किसी के जवाब से संतुष्ट नही होता। कुछ विद्वान कहते है- मरने के बाद लोग स्वर्ग मे जाते। कुछ विद्वान कहते है स्वर्ग जैसी कोई च़ीज ही नहीं होती। और इस बात पर ही तर्क-वितर्क होने लगता है। राजा सोचता है कि जब यह बात एक-दुसरे को ही नहीं समझा पा रहे है स्वर्ग है या नहीं, मरने के बाद जीवन है भी या नहीं तो ये मुझे क्या समझाएंगे? विद्वानों में एक लंबा तर्क-वितर्क चलने लगता है। राजा गुस्सा जाता है– मैंने आपलोंगो को यहां शास्त्रार्थ करने के लिए नहीं बुलाया है। मुझे अपने प्रश्न का सिर्फ उत्तर चाहिए।
       एक विद्वान खड़ा होकर -महाराज! मैं तो उसी प्रश्न का उत्तर दे रहा था। राजा कि आँखें गुस्से में लाल हो जाती हैं। वह तमतमाते हुए सभी विद्वानों को संबोधित करता है – मैंने तो एक छोटा-सा सवाल पूछा था, उसका तो जवाब दिया नही जाता और आपस में कुत्तों की तरह लड़ रहें हैं और मुझसे कहते है मैं आपके सवालों का जवाब दे रहा हूँ। पिछले चार पहर से आपलोग किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे और बोलते हैं कि मैं जवाब दे रहा हूँ। जवाब का मतलब तर्क नहीं होता जवाब होता है। मैं आपलोगों को दस दिन कि मोहल्लत दे रहा हूँ। आपलोग अपने-अपने घर जाइए और ग्यारहवें दिन आकर मुझे सही उत्तर दीजिए अथवा जिसने गलत जवाब दिया या तर्क-वितर्क में पड़ा तो उसका  सर धड़ से अलग कर दिया जाएगा। सभी विद्वानों में एक सन्नाटा-सा छा जाता है और वे लोग आपस में एक-दुसरे से फुसफूसाने लगते हैं। महाराज ठीक तो है न या पागल हो गए है। एक विद्वान बोलता है अभी चुपचाप खिसकने में ही भलाई है, नहीं तो किसका सर धड़ से अलग होगा पता भी नहीं चलेगा। सभी विद्वान अपने-अपने घर चले जाते है।
    ग्यारहवें दिन राजा सुबह से ही दरबार में बैठा सोचता रहता है-आज मेरे प्रश्न का जवाब मिलेगा या नहीं। राजा को बैठे-बैठे पुरा दिन गुजर जाता है पर एक भी विद्वान के दर्शन नहीं होते। राजा सोचता है की क्या उन्हें और समय चाहिए था? राजा मन में सोचता है ठिक है जितना समय चाहिए उतना समय ले लें। देखते-देखते एक साल गुजर गया पर एक भी विद्वान के दर्शन नहीं हो सके। राजा सोचता है इतना समय? फिर एक दरबारी को बुलाता है और बोलता है जाओ देखों वे लोग एक साल से क्या कर रहें हैं? दरबारी वहां से चला जाता है।
  दरबारी आकर राजा से बोलता है-महाराज! मुझे पता चल गया वे लोग एक साल से क्या कर रहे थे? राजा-तो बताओ क्या कर रहे वे लोग? दरबारी – शहर मे जो बगान है उसमें बैठकर आपके प्रश्न का उत्तर ढूँढ रहें हैं। राजा आश्चर्य से – एक वर्ष से! राजा-तुमने ठीक से तो पता किया हैं न? दरबारी -जी महाराज! वह सुबह उठ के आपके प्रश्न पर तर्क-वितर्क करते और शाम तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे। यही सिलसिला पिछले एक साल से चल रहा है। इसी कारण से वे यहाँ नहीं आंए है। राजा-सभी कहते है वे विद्वान है, पर मुझे लगता है वे निरा मुर्ख है, जो अभी तक एक प्रश्न का भी उत्तर नहीं ढूँढ पायें हैं। दरबारी-मैं एक बात बोलूं महाराज, जहां चार आदमी जूट जाते हैं वे कभी एक निर्णय पर नहीं पहुंच सकते है। महाराज एक कहावत भी है-जादा जोगी, मठ उजाड़।
       राजा सोचता है उनलोगों से ज्यादा विद्वान तो यह है। फिर राजा उससे पुछता है -तुम्हें क्या लगता है मरने के बाद लोग कहाँ जाते है? दरबारी- ये तो पता नहीं महाराज, पर लोग ज़िंदा रहते हुए भी मर जाते है। राजा गहरी सोच में-मतलब! कहना क्या चाहते हो तुम? दरबारी – महाराज! जो अपना काम-धंधा छोड़कर फालतू के कामों मे दिमाग लगाते है वो ज़िंदा होकर भी मरे हुए के समान है। उन विद्वानों को ही देख लीजिए उनका काम है बच्चों को ज्ञान देना, वह काम छोड़कर वे एक साल से तर्क मे लगे हुए है। दरबारी की बात सुनकर राजा को लगता है कि मरने के बाद क्या होगा इस बारे सोचना छोड़कर मुझे ये सोचना चाहिए कि मैं ऐसा क्या करू़ की लोग मुझे मरने के बाद भी याद करे।

Comments

  1. बहुत खूब! मरने के बाद क्या होगा? ऐसे सवालो का जवाब ढूंढने से अच्छा है हम जीवन का एक एक दिन यथार्थ काम मे लगाए।
    कर्म के सिद्धांत को ध्यान में रखकर अपना कल सवारे, तो मंरने के बाद भी वही क्रम जारी रहेगा।

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  2. बहुत उमदा कहानी है । लेखिका मानसी जी
    आपको बहुत - बहुत शुभकामनाएं । आपने काफी अच्छा संदेश दिया है कि हमें अपना समय व्यर्थ में नहीं गवाना चाहिए बल्कि अपना काम करना चाहिए।

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