आज की लड़की ( फिर वही समस्या )
आज की लड़की
(फिर वही समस्या)
आज सुबह घर में कोहराम मचा हुआ था। मेरा भाई चिल्ला रहा था। माँ भी कुछ बोल रही थी। मैंने पुछा-क्या हुआ? माँ-तू चुप रह! क्यों? कोई बताएगा क्या हो रहा है? दस लोग दस तरह कि बातें करते हैं और तुम्हें इसमें पड़ने कि जरूरत नहीं। पुजा को समझते देर न लगी, मेरे बारे में बात हो रही है। उसका भाई रोहन(चिल्लाते हुए)-हां! तेरे बारे में ही हो रही है। इतना स़ज-सवर के बाहर जाने कि जरूरत हीं क्या है? दस लोग मुझे मिल जाते हैं सुनाने के लिए। लड़की हो लड़की की तरह रहो, लड़का बनने की जरूरत नहीं। उसकी माँ रोहन को बिच में काटते हुए-पहले अपनी बहन से तो पूछ क्या हुआ है? ऐसे ही आकर चिल्लाना शुरू कर देता है। लोगों का तो काम ही है एक-दुसरे को भड़काना। पुजा-मैंने किया क्या है? रोहन-यही बात तो मैं तुमसे पूछने वाला था, तुने किया क्या है? पुजा-कब? रोहन-कल। पुजा - गली-मोहल्ले के लड़के मेरी दोस्त नेहा पे फब्बतियाँ कस रहे थे। मैंने सुना दिया। रोहन-क्या जरूरत थी मुँह लगाने की? घर आकर बोल भी तो सकती थी। दस लोग मुझसे पूछ रहे थे-क्या हुआ? मुझे क्या पता क्या हुआ? जब देखो लड़का बनी फिरती है। लड़की हो लड़की की तरह रहो,अब बड़ी हो गई हो। ऐसा चलता रहा तो तेरा घर से बाहर जाना बंद हो जाएगा। माँ-मुझे तो विश्वास ही नहीं होता, तुने सुना दिया! पुजा-हां! क्यों गलत किया? तुम्हीं तो सिखाती हो-अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठा। हमलोगो ने ही तुम्हें बिगडा़ है, घर मे बोलते-बोलते आदत हो गई है। पुजा(रोते हुए) – मैंने तो कुछ गलत नहीं किया, जो सही लगा वही किया। रोहन अपनी बहन को प्यार से समझाते हुए-अरी पगली! बात क्यों नहीं समझती? रहना तो हमें इसी समाज में है न? कल हो के लोग एक का चार लगा के सुनाएंगे। अब तू मैट्रिक कर गई है। आगे कुछ करना है या इन्ही सब झमेलो में फस के रह जाना है। मैं चाहता हूँ तू जिन्दगी में आगे बढ़। इसलिए तो रोकता हूँ।
माँ-लड़के तो गोबर होते है, वो तुम पर गिरे या तुम उन पे नुकसान तो अपना ही है। (पुजा समझ ही नहीं पाती है, ये हो क्या रहा है? सभी कह रहे है तुम सही हो, फिर भी गलत हो, अजीब विडंबना है। पुजा के लिए चीजें सही या गलत होती थी। आज, द्वंद मे फंसी सही और गलत के बीच अपना आत्मविश्वास खोते हुए।
कॉलेज का पहला दिन। पुजा बहुत खुश है। कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रही है। रोहन पुजा से-देख! तेरी कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए। पुजा-कैसी शिकायत? यही जो झाँसी की रानी बनी फिरती हो न उसकी। मान ले, लड़की है संयम रख। पुजा-मुँह चिढ़ाती है-हूंह! रोहन-देख माँ ये नहीं सुधरने वाली, मुझे तो लगता है इसकी पढ़ाई-लिखाई छोड़वा देनी चाहिए। माँ-तू दोनों फिर लड़ने लगा। बड़ा भाई है, कुछ समझा रहा है सुना नहीं जाता तुम से? पुजा-दिन-रात तो नसीहत दी जाती है। अपने मन में बुदबुदाते हुए-लड़की होना ही पाप है।
उसकी सहेली नेहा आवाज़ देती है-पहले ही दिन लेट करेगी क्या? नही आ रही हूँ। दोनों कॉलेज के लिए निकल जाती है। पुजा नेहा से-घरवालों ने इतनी नसीहत दी है जैसे कॉलेज नही ससुराल जा रही हूँ। ये मत करना, वो मत करना, ऐसे करना, वैसे करना। नेहा-रहने दे न यार उन लोगों का तो काम ही है बोलना और हमारा काम है सुनना, चलो! मजे करते है। पुजा भी सहमति भरती है – हां बिल्कुल सही। इसी तरह हंसी-खुशी कॉलेज के पंद्रह दिन गुजर जाते है।
नेहा पुजा से-ये लड़का रोज यहीं खड़ा रहता है। पुजा थोड़ी शरारत भरी नजरों से-तुम्हें ही देखता होगा। नेहा-नहीं! वो तुम्हारे पिछे पड़ा है, मैंने गौर किया है। पुजा-अरे बाप रे! ऐसा कैसे हो सकता है? नेहा-डरती क्यों है? कुछ बोलेगा तो घर जा कर बोल देंगे। उसे भी तो डर होगा। पुजा-नहीं!नहीं! घर में पता चलेगा तो कॉलेज आना बंद हो जाएगा। वो लोग तो पहले ही दिन से धमका रहे थे। नेहा-क्यों? क्या हुआ? क्या धमकी दे रहे थे? पुजा-याद है तुम्हें वो गली-मोहल्ले के लड़के, उसी बात को लेकर आज भी ताना मारते है। उनको पता चला तो कॉलेज छुड़वा देंगे। कुछ भी हो नुकसान हमारा ही है। नेहा-चल न कल से रास्ता बदल के जाएंगे। पुजा-ठीक है।
दो-तीन दिन बाद-अरे! ये तो इस रास्ते में भी है। नेहा-ये तेरा पक्का आशिक लगता है। पुजा डर के मारे कांपते हुए-घर वाले मुझे छोड़ेंगे नहीं। लड़का बगल से गुजरता है और अपशब्द कह के निकल जाता है। पुजा नेहा से-ये आशिक है, छिछोरा कहीं का, बोलने तक की तो तमीज़ नहीं है। प्रेमी तो प्रेमिका के लिए जान तक दे देते है और आज-कल के लड़के उसी कि जान ले लेते है। नेहा-इसका कुछ करना होगा नहीं तो कुछ गलत हो जाएगा। पुजा-समझ में भी तो नहीं आता क्या करें इसका? घरवाले तो बोलते है लड़को से दूर रहो, अभी कोई दोस्त होता तब इसके दिमाग ठिकाने लगा देती मैं। दिन पर दिन लड़के कि बदतमीजी बढ़ती जाती है। पुजा को समझ ही नहीं आता वो क्या करे।
पुजा एक दिन अपनी माँ से-माँ, आजकल रोड पर चलो तो लड़के कुछ न कुछ बोल ही देते है, नहीं? माँ-हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार। इतने मे रोहन-क्यों? तुझे कोई कुछ बोल रहा था क्या? पुजा-नहीं! मेरी एक दोस्त को कुछ बोल रहा था। रोहन-इन सब चीज़ों से दूर ही रह तुम। नहीं तो तेरा कॉलेज जाना बंद। पुजा-बात बात पे धमकी क्या देता रहता है? तू भी तो लड़का है, तू नहीं समझता? लड़के तो ऐसा बोलते हीं है। रोहन-लड़के गलत नहीं होते, लड़कियां ही गलत होती हैं। ऐसे-ऐसे कपड़े पहनने है, रोड पर चलते हंसती है तो लड़के कुछ न कुछ बोलेंगे ही न। श़रिफ लड़कियों को लड़के कुछ नहीं बोलते। पुजा स्तब्ध हो गई। सोचा बिना जाने बुझे ही इसने सोच लिया लड़कियां गलत है। माँ-तुम दोनों क्यों बहस कर रहे हो? लड़कियां सिर झुका के चले तो कोई कुछ नहीं बोलता। मैंने भी दुनिया देखी है। पुजा को समझ में ही नही आता है कि इनलोगो से अपने बारे मे क्या बात करू़ और कैसे? वो चुपचाप कॉलेज के लिए निकल जाती है।
कॉलेज में नेहा-क्या बात है बहुत खामोश हो (पुजा से)? पुजा-यार क्या बताऊ? सोचा घरवालों को बता दूं। उस लड़के कि बद्तमिजीयां दिन पर दिन बढ़ती जा रही है? आज तो हद ही हो गई। मेरा दुपट्टा पकड़ लिया था। नेहा-क्या बात करती है? पुजा-बड़ी मुश्किल से छुड़ा के भागी हूँ यार! क्या बताऊं? नेहा-अब कुछ करना होगा, नही तो ठीक नहीं रहेगा तेरे लिए। पुजा-क्या करू़ यार? उसने सौ बार पूछा होगा और मैंने हजार बार कहा-I’m not interested in you. रोड पर चलते हुए आए दिन लड़के लड़कियों पर फब्तियां कसते है, अश्लील बातें बोलते है और अश्लील करते है कोई कुछ नहीं बोलता। ऐसा लगता है कि बोलकर ही Rape कर दिया है उन लोगों ने। खुद मे ही कितना टूट जाते हैं हम ये कोई नहीं समझ सकता। उल्टा मज़ा लेते हैं सभी। किसी से कहो तो कह देते हैं सिर झुका के चलो लेकिन कोई पिछे ही पड़ जाए तो उससे भी बचने का उपाय बता दिया होता इन लोगों ने।
नेहा-अरे यार! लड़की होना ही पाप है। अगर घर में कुछ कहो तो कॉलेज छुड़ा देंगे। भाई कितने दिन जाएगा कॉलेज छोड़ने, पढाई ही तो करनी है Distance से कर लो। पुजा-हमारी क्या गलती है यार हम क्यों Distance से पढ़ाई पूरी करें।
क्यों छीन ली जाती हैं हमारी आज़ादी।
क्यों हम जिंए घूट-घूट के उन बंद कमरो में।।
पहले तो पंख तोड़ देते हैं और फिर।
बोलते हैं इसे उड़ना नहीं आता।।
हम भी बता देते उनको की हम क्या हैं।
अगर ये समाज का बंधन न होता।।
काश! ये समाज सही और गलत मे
फर्क करना जानता।
पुजा चीखते हुए- क्यों छीन ली जाती है हमारी आजादी गलत वे हैं छीन ले उनकी आजादी! नेहा-रहने दे यार बोलने और चिख़ने से कुछ नहीं होने वाला हमें ही कुछ करना होगा। पुजा-मतलब! क्या चल रहा है तुम्हारे दिमाग मे? नेहा-वो जानते हैं कि हम डरते है उनसे इसलिए हमें डरते हैं। डर छोड़ दो डराना छोड़ देंगे।
वो दोनों अपनी सहेलियों के पास जाती हैं और इस बारे मे बात करती हैं। वे सभी बोलती है ये तो आए दिन का। किस्सा हो गया है यार। नेहा-हमारी तब तक कोई मदद नहीं कर सकता जब तक हम अपनी मदद खुद नहीं करेंगे। सभी लड़कियां मतलब क्या है तुम्हारा? नेहा-वो रोज पुजा को डराता है चलो आज हम उसे डरते हैं। सहेलियां एक स्वर में-अरे! बाप रे! घर में पता चला न छोड़ेंगे नहीं घरवाले एक के चक्कर में सभी जाएंगे। पुजा-ठीक बोलती है ये लोग। मुझे नहीं करना कोई तमाशा। पुजा वहां से गुस्से में अकेले ही निकल जाती है। रास्ते में वो लड़का फिर मिल जाता है और पुजा का हाथ पकड़कर धमकी देता है तुम मेरी हो प्यार से मान जाओ नहीं तो तेजाब से जलने के बाद तुम्हारा चेहरा दूसरे को तो क्या खुद भी देखने लायक नहीं रहेगा। पूजा रोने लगती है और गिड़गिड़ाते हुए उस लड़के से कहती है -मुझे छोड़ दो, मैं तुम्हें पसंद नहीं करती, मुझे माफ करो, मुझे घर जाने दो। लड़का खुश होता है और अपने पुरुषार्थ को संतुष्ट करने के लिए पुजा को अपनी बाहों में जकड़ लेता है। पुजा को लगता है अब कुछ नहीं बाकी रहा बोलने को, उसका खोता आत्मविश्वास गुस्से मे बदल जाता है और वह उस लड़के को दांतों से काट खाती है। लड़का दर्द से चिल्लाते हुए पिछे हट जाता है। लड़का तेज़ाब कि बोतल अपनी जेब से निकालते हुए पुजा पर फेंकने कि कोशीश करता है। पुजा लपक कर तेज़ाब का बोतल छिन लेती है। पुजा लड़के से-अब तू बता तेरा चेहरा कौन देखेगा.....
यूं खुशियों को छीन लिया तुने मुझसे।
जैसे किसी ने छीन ली हो मेरी आत्मा मुझसे।
किसी दिन तो निकलेगी एक च़ीख मेरे ही अंदर से।
जो मिटा देगी तुमको।।
(फिर वही समस्या)
आज सुबह घर में कोहराम मचा हुआ था। मेरा भाई चिल्ला रहा था। माँ भी कुछ बोल रही थी। मैंने पुछा-क्या हुआ? माँ-तू चुप रह! क्यों? कोई बताएगा क्या हो रहा है? दस लोग दस तरह कि बातें करते हैं और तुम्हें इसमें पड़ने कि जरूरत नहीं। पुजा को समझते देर न लगी, मेरे बारे में बात हो रही है। उसका भाई रोहन(चिल्लाते हुए)-हां! तेरे बारे में ही हो रही है। इतना स़ज-सवर के बाहर जाने कि जरूरत हीं क्या है? दस लोग मुझे मिल जाते हैं सुनाने के लिए। लड़की हो लड़की की तरह रहो, लड़का बनने की जरूरत नहीं। उसकी माँ रोहन को बिच में काटते हुए-पहले अपनी बहन से तो पूछ क्या हुआ है? ऐसे ही आकर चिल्लाना शुरू कर देता है। लोगों का तो काम ही है एक-दुसरे को भड़काना। पुजा-मैंने किया क्या है? रोहन-यही बात तो मैं तुमसे पूछने वाला था, तुने किया क्या है? पुजा-कब? रोहन-कल। पुजा - गली-मोहल्ले के लड़के मेरी दोस्त नेहा पे फब्बतियाँ कस रहे थे। मैंने सुना दिया। रोहन-क्या जरूरत थी मुँह लगाने की? घर आकर बोल भी तो सकती थी। दस लोग मुझसे पूछ रहे थे-क्या हुआ? मुझे क्या पता क्या हुआ? जब देखो लड़का बनी फिरती है। लड़की हो लड़की की तरह रहो,अब बड़ी हो गई हो। ऐसा चलता रहा तो तेरा घर से बाहर जाना बंद हो जाएगा। माँ-मुझे तो विश्वास ही नहीं होता, तुने सुना दिया! पुजा-हां! क्यों गलत किया? तुम्हीं तो सिखाती हो-अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठा। हमलोगो ने ही तुम्हें बिगडा़ है, घर मे बोलते-बोलते आदत हो गई है। पुजा(रोते हुए) – मैंने तो कुछ गलत नहीं किया, जो सही लगा वही किया। रोहन अपनी बहन को प्यार से समझाते हुए-अरी पगली! बात क्यों नहीं समझती? रहना तो हमें इसी समाज में है न? कल हो के लोग एक का चार लगा के सुनाएंगे। अब तू मैट्रिक कर गई है। आगे कुछ करना है या इन्ही सब झमेलो में फस के रह जाना है। मैं चाहता हूँ तू जिन्दगी में आगे बढ़। इसलिए तो रोकता हूँ।
माँ-लड़के तो गोबर होते है, वो तुम पर गिरे या तुम उन पे नुकसान तो अपना ही है। (पुजा समझ ही नहीं पाती है, ये हो क्या रहा है? सभी कह रहे है तुम सही हो, फिर भी गलत हो, अजीब विडंबना है। पुजा के लिए चीजें सही या गलत होती थी। आज, द्वंद मे फंसी सही और गलत के बीच अपना आत्मविश्वास खोते हुए।
कॉलेज का पहला दिन। पुजा बहुत खुश है। कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रही है। रोहन पुजा से-देख! तेरी कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए। पुजा-कैसी शिकायत? यही जो झाँसी की रानी बनी फिरती हो न उसकी। मान ले, लड़की है संयम रख। पुजा-मुँह चिढ़ाती है-हूंह! रोहन-देख माँ ये नहीं सुधरने वाली, मुझे तो लगता है इसकी पढ़ाई-लिखाई छोड़वा देनी चाहिए। माँ-तू दोनों फिर लड़ने लगा। बड़ा भाई है, कुछ समझा रहा है सुना नहीं जाता तुम से? पुजा-दिन-रात तो नसीहत दी जाती है। अपने मन में बुदबुदाते हुए-लड़की होना ही पाप है।
उसकी सहेली नेहा आवाज़ देती है-पहले ही दिन लेट करेगी क्या? नही आ रही हूँ। दोनों कॉलेज के लिए निकल जाती है। पुजा नेहा से-घरवालों ने इतनी नसीहत दी है जैसे कॉलेज नही ससुराल जा रही हूँ। ये मत करना, वो मत करना, ऐसे करना, वैसे करना। नेहा-रहने दे न यार उन लोगों का तो काम ही है बोलना और हमारा काम है सुनना, चलो! मजे करते है। पुजा भी सहमति भरती है – हां बिल्कुल सही। इसी तरह हंसी-खुशी कॉलेज के पंद्रह दिन गुजर जाते है।
नेहा पुजा से-ये लड़का रोज यहीं खड़ा रहता है। पुजा थोड़ी शरारत भरी नजरों से-तुम्हें ही देखता होगा। नेहा-नहीं! वो तुम्हारे पिछे पड़ा है, मैंने गौर किया है। पुजा-अरे बाप रे! ऐसा कैसे हो सकता है? नेहा-डरती क्यों है? कुछ बोलेगा तो घर जा कर बोल देंगे। उसे भी तो डर होगा। पुजा-नहीं!नहीं! घर में पता चलेगा तो कॉलेज आना बंद हो जाएगा। वो लोग तो पहले ही दिन से धमका रहे थे। नेहा-क्यों? क्या हुआ? क्या धमकी दे रहे थे? पुजा-याद है तुम्हें वो गली-मोहल्ले के लड़के, उसी बात को लेकर आज भी ताना मारते है। उनको पता चला तो कॉलेज छुड़वा देंगे। कुछ भी हो नुकसान हमारा ही है। नेहा-चल न कल से रास्ता बदल के जाएंगे। पुजा-ठीक है।
दो-तीन दिन बाद-अरे! ये तो इस रास्ते में भी है। नेहा-ये तेरा पक्का आशिक लगता है। पुजा डर के मारे कांपते हुए-घर वाले मुझे छोड़ेंगे नहीं। लड़का बगल से गुजरता है और अपशब्द कह के निकल जाता है। पुजा नेहा से-ये आशिक है, छिछोरा कहीं का, बोलने तक की तो तमीज़ नहीं है। प्रेमी तो प्रेमिका के लिए जान तक दे देते है और आज-कल के लड़के उसी कि जान ले लेते है। नेहा-इसका कुछ करना होगा नहीं तो कुछ गलत हो जाएगा। पुजा-समझ में भी तो नहीं आता क्या करें इसका? घरवाले तो बोलते है लड़को से दूर रहो, अभी कोई दोस्त होता तब इसके दिमाग ठिकाने लगा देती मैं। दिन पर दिन लड़के कि बदतमीजी बढ़ती जाती है। पुजा को समझ ही नहीं आता वो क्या करे।
पुजा एक दिन अपनी माँ से-माँ, आजकल रोड पर चलो तो लड़के कुछ न कुछ बोल ही देते है, नहीं? माँ-हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार। इतने मे रोहन-क्यों? तुझे कोई कुछ बोल रहा था क्या? पुजा-नहीं! मेरी एक दोस्त को कुछ बोल रहा था। रोहन-इन सब चीज़ों से दूर ही रह तुम। नहीं तो तेरा कॉलेज जाना बंद। पुजा-बात बात पे धमकी क्या देता रहता है? तू भी तो लड़का है, तू नहीं समझता? लड़के तो ऐसा बोलते हीं है। रोहन-लड़के गलत नहीं होते, लड़कियां ही गलत होती हैं। ऐसे-ऐसे कपड़े पहनने है, रोड पर चलते हंसती है तो लड़के कुछ न कुछ बोलेंगे ही न। श़रिफ लड़कियों को लड़के कुछ नहीं बोलते। पुजा स्तब्ध हो गई। सोचा बिना जाने बुझे ही इसने सोच लिया लड़कियां गलत है। माँ-तुम दोनों क्यों बहस कर रहे हो? लड़कियां सिर झुका के चले तो कोई कुछ नहीं बोलता। मैंने भी दुनिया देखी है। पुजा को समझ में ही नही आता है कि इनलोगो से अपने बारे मे क्या बात करू़ और कैसे? वो चुपचाप कॉलेज के लिए निकल जाती है।
कॉलेज में नेहा-क्या बात है बहुत खामोश हो (पुजा से)? पुजा-यार क्या बताऊ? सोचा घरवालों को बता दूं। उस लड़के कि बद्तमिजीयां दिन पर दिन बढ़ती जा रही है? आज तो हद ही हो गई। मेरा दुपट्टा पकड़ लिया था। नेहा-क्या बात करती है? पुजा-बड़ी मुश्किल से छुड़ा के भागी हूँ यार! क्या बताऊं? नेहा-अब कुछ करना होगा, नही तो ठीक नहीं रहेगा तेरे लिए। पुजा-क्या करू़ यार? उसने सौ बार पूछा होगा और मैंने हजार बार कहा-I’m not interested in you. रोड पर चलते हुए आए दिन लड़के लड़कियों पर फब्तियां कसते है, अश्लील बातें बोलते है और अश्लील करते है कोई कुछ नहीं बोलता। ऐसा लगता है कि बोलकर ही Rape कर दिया है उन लोगों ने। खुद मे ही कितना टूट जाते हैं हम ये कोई नहीं समझ सकता। उल्टा मज़ा लेते हैं सभी। किसी से कहो तो कह देते हैं सिर झुका के चलो लेकिन कोई पिछे ही पड़ जाए तो उससे भी बचने का उपाय बता दिया होता इन लोगों ने।
नेहा-अरे यार! लड़की होना ही पाप है। अगर घर में कुछ कहो तो कॉलेज छुड़ा देंगे। भाई कितने दिन जाएगा कॉलेज छोड़ने, पढाई ही तो करनी है Distance से कर लो। पुजा-हमारी क्या गलती है यार हम क्यों Distance से पढ़ाई पूरी करें।
क्यों छीन ली जाती हैं हमारी आज़ादी।
क्यों हम जिंए घूट-घूट के उन बंद कमरो में।।
पहले तो पंख तोड़ देते हैं और फिर।
बोलते हैं इसे उड़ना नहीं आता।।
हम भी बता देते उनको की हम क्या हैं।
अगर ये समाज का बंधन न होता।।
काश! ये समाज सही और गलत मे
फर्क करना जानता।
पुजा चीखते हुए- क्यों छीन ली जाती है हमारी आजादी गलत वे हैं छीन ले उनकी आजादी! नेहा-रहने दे यार बोलने और चिख़ने से कुछ नहीं होने वाला हमें ही कुछ करना होगा। पुजा-मतलब! क्या चल रहा है तुम्हारे दिमाग मे? नेहा-वो जानते हैं कि हम डरते है उनसे इसलिए हमें डरते हैं। डर छोड़ दो डराना छोड़ देंगे।
वो दोनों अपनी सहेलियों के पास जाती हैं और इस बारे मे बात करती हैं। वे सभी बोलती है ये तो आए दिन का। किस्सा हो गया है यार। नेहा-हमारी तब तक कोई मदद नहीं कर सकता जब तक हम अपनी मदद खुद नहीं करेंगे। सभी लड़कियां मतलब क्या है तुम्हारा? नेहा-वो रोज पुजा को डराता है चलो आज हम उसे डरते हैं। सहेलियां एक स्वर में-अरे! बाप रे! घर में पता चला न छोड़ेंगे नहीं घरवाले एक के चक्कर में सभी जाएंगे। पुजा-ठीक बोलती है ये लोग। मुझे नहीं करना कोई तमाशा। पुजा वहां से गुस्से में अकेले ही निकल जाती है। रास्ते में वो लड़का फिर मिल जाता है और पुजा का हाथ पकड़कर धमकी देता है तुम मेरी हो प्यार से मान जाओ नहीं तो तेजाब से जलने के बाद तुम्हारा चेहरा दूसरे को तो क्या खुद भी देखने लायक नहीं रहेगा। पूजा रोने लगती है और गिड़गिड़ाते हुए उस लड़के से कहती है -मुझे छोड़ दो, मैं तुम्हें पसंद नहीं करती, मुझे माफ करो, मुझे घर जाने दो। लड़का खुश होता है और अपने पुरुषार्थ को संतुष्ट करने के लिए पुजा को अपनी बाहों में जकड़ लेता है। पुजा को लगता है अब कुछ नहीं बाकी रहा बोलने को, उसका खोता आत्मविश्वास गुस्से मे बदल जाता है और वह उस लड़के को दांतों से काट खाती है। लड़का दर्द से चिल्लाते हुए पिछे हट जाता है। लड़का तेज़ाब कि बोतल अपनी जेब से निकालते हुए पुजा पर फेंकने कि कोशीश करता है। पुजा लपक कर तेज़ाब का बोतल छिन लेती है। पुजा लड़के से-अब तू बता तेरा चेहरा कौन देखेगा.....
यूं खुशियों को छीन लिया तुने मुझसे।
जैसे किसी ने छीन ली हो मेरी आत्मा मुझसे।
किसी दिन तो निकलेगी एक च़ीख मेरे ही अंदर से।
जो मिटा देगी तुमको।।
हम उम्मीद करते है सभी लडकिया ऐसी बहादुरी दिखाए। लड़की पर तेजाब डालना लड़को के लिए एक खेल हो गया है। जबकि लड़िकयों का जीवन दुर्भर हो जाता है। तकलीफ ये है कि घरवाले भी लड़की का साथ नहीं देते।
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteबेहद उम्दा
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