आधुनिक युग में टूटते रिश्ते का सच

              सनी और डिंपल दोनों आज़ाद ख्याल के थे और दोनों कि दोस्ती उससे भी ज़्यादा आज़ाद। दोनों एक दूसरे पर कभी शक नहीं करते थे। डिंपल कमाल की खूबसूरत थी। कॉलेज के सभी लड़के उस पर दिल दे बैठे थे। मगर डिंपल का दिल आया भी तो सनी पर और सिर्फ सनी पर। वह दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। सनी थोड़ा शर्मीला था मगर डिंपल मे हर वह चीज थी जो हर लड़का अपने पार्टनर में ढूंढता है भरोसा, खूबसूरती और समझदारी। एक दिन सनी डिंपल से – यह तुम्हारे सुनहरे बाल देख कर मुझे वह दिन याद आ जाता है जब मैं बालकनी में खड़ा था और सुनहरी-सी चादर आकाश में बिछी थी। डिंपल मुस्कुराते हुए – अच्छा! तुम मुझे सिर्फ आकाश में ही देखते हो। कभी कोई अच्छी तुलना तो कर लिया करो यार। सनी थोड़ा मुस्कुराते हुए – क्यों? यही उपमाएं तो कहानियों और कविताओं में दी जाती है तो लोग रूपक अलंकार और पता नहीं क्या-क्या कहते हैं और सभी लोग खुश होते हैं। डिंपल सनी को छेड़ते हुए – अच्छा! तो तुम मुझे काव्य के द्वारा मोहित करने की कोशिश कर रहे हो? सनी नहीं मैं बस यूं ही कह रहा था। डिंपल – तुम्हें क्या लगता है तुम्हें मुझे मोहित करने के लिए किसी काव्य की जरूरत है? सनी – नहीं! इसकी तो बिल्कुल जरूरत नहीं है। डिंपल – क्यों? तुम्हें नहीं लगता मुझे आकर्षित करने के लिए किसी चीज की जरूरत नहीं है? सनी दिल्लगी करते तिरछी निगाहों से डिंपल को देखते हुए नहीं इसके लिए तो मेरी आंखें ही काफी है। डिंपल सनी के इस हरकत से झेप जाती है और कहती है – अच्छा बहुत हो गया। अब हम चलें? सनी भी डिंपल के साथ खड़ा हो जाता है और वह दोनों क्लास रूम की ओर जाते हैं। डिंपल - तुमने क्या सोचा है कॉलेज खत्म होने के बाद क्या करना है? सनी ज्यादा कुछ तो पता नहीं है लेकिन मैं सोच रहा था M.A कर लेता तो अच्छा रहता। डिंपल अब M.A करोगे, हम शादी कब करेंगे? सनी – कर लेंगे यार। इसमें क्या है? तुम कहो तो अभी ही कर लेते हैं। डिंपल तुम रहने दो तुमसे यह सब ना होगा। मुझे लगता है हमारी दोस्ती तक ही ठीक है।
                        सनी क्लास रूम में जाता है लेक्चर शुरू होता है। डिंपल अपनी नजरें घुमाते हुए सनी को इशारे करती है -यह लेक्चर खत्म होने से पहले शादी कर लोगे? सनी मुस्कुराने लगता है। सनी – क्या बात है? शादी का इतना भूत धर लिया है तुम्हें? डिंपल बस यूं ही लगता है कॉलेज खत्म होते-होते कहीं मेरी शादी ना हो जाए, इसीलिए। सनी – अच्छा ठीक है, हम क्लास के बाद बात करते हैं इस बारे में। डिंपल – नहीं! मुझे कुछ जरूरी काम है मैं तुरंत निकलूंगी। कल हम मिलेंगे तो इस पर बात होगी। सनी ठीक है क्लास खत्म होता है और डिंपल वहां से निकल जाती है।
                डिंपल जब घर पहुंचती है तब उसकी मां प्रेमावती – कैसी हो बेटी? नाश्ता लगा दूं? नहीं मां खाने का मन नहीं है। बस थोड़ा आराम करना चाहती हूं। क्यों तबीयत ठीक नहीं है? नहीं! सब ठीक है। बस थोड़ा आराम करना चाहती हूं। प्रेमा  अपनी बेटी से – क्यों कोई बात हो गई क्या? डिंपल – कुछ नहीं, बस यही सोच रही थी अब क्लासेस खत्म होने वाले हैं। क्या होगा? आगे क्या करूंगी? प्रेमा – कुछ नहीं, आगे क्या करना है? तुम्हें एक अच्छी सी नौकरी ले लेनी है। डिंपल मुस्कुराने लगती है मां मैं तुमसे यही उम्मीद करती थी। मैं तो कल डर ही गई थी दादी की बातें सुनकर वह बोल रही थी अब इसकी शादी कर देनी है। प्रेमा – तुम्हें इन सब चीजों में पड़ने की कोई जरूरत नहीं है। बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो। शादी, शादी क्या है? वह तो होनी होगी तो हो ही जाएगी। डिंपल थोड़ा परेशान – मतलब? मतलब क्या है तुम्हारा? इसका मतलब है कि तुम लड़का देख रही हो? प्रेमा – ऐसी बात नहीं है बेटे? बिना तुम्हारे पूछे तो शादी नहीं ही कर देंगे? शादी करने से पहले तो तुम से पूछेंगे जरूर ही। अच्छा मिलेगा तभी ना और अभी से ढूंढेंगे तभी तो अच्छा लड़का मिलेगा? डिंपल – मां! मुझे कुछ साल और दे दिए जाते ताकि मैं कोई अच्छी सी जॉब कर लेती तो अच्छा होता। प्रेमा अपनी बेटी के मासूम चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए और उसकी आंखों में आंखें डाल कर – तेरी इच्छा के बगैर कुछ ऐसा नहीं करूंगी जो तुम्हें सही ना लगे। अगर तू पढ़ना चाहती है तो आराम से पढ़। एक ही तो बेटी है तू मेरी। मां की बातें सुनकर डिंपल खुश हो जाती है और उसी समय उसके चेहरे की सारी थकान दूर हो जाती है। वह अपने कमरे में जाती हैं और पढ़ाई करने लगती है।
            अगली सुबह उठकर उसे सनी से मिलने जाना रहता है। सनी उसका इंतजार करते रहता है। डिंपल के चेहरे पर कुछ और ही रौनक रहती है सनी समझ नहीं पाता है। सनी बिना सोचे-समझे बस सीधा सा सवाल डिंपल पर दाग देता है - क्या बात है तुम शादी करना चाहती हो? मैंने तुम्हें आज तक इतना बेचैन नहीं देखा इस प्रश्न पर। डिंपल मुस्कुराते हुए नहीं ऐसी बात नहीं है बस कुछ दिनों से लग रहा था जैसे मैं बंदिशों में हूं। कल ही मां से बात हुई उन्होंने कहा तुम अपनी पढ़ाई को जैसे चाहो आगे बढ़ा सकती हो। तुम पर कोई भी किसी तरह का प्रेशर नहीं दिया जाएगा। एक ही तो बच्ची हो तुम्हारी इच्छा के बगैर कुछ नहीं किया जाएगा। सनी – ओ! ऐसी बात थी। शादी का प्रेशर था इसलिए शादी करनी थी। डिंपल थोड़ा चिढ़ते हुए – तुम्हें नहीं करनी तो मुझे भी नहीं करनी है। लाखों मिल जाएंगे। सनी – करोड़ों मिल जाएंगे पर मेरे जैसा नहीं। डिंपल उसे प्यार भरी नजरों से देखती है। सनी डिंपल को अपनी बाहों में समेट लेता है और कहता है – तुम चिंता मत करो, शादी तो मैं तुमसे ही करूंगा। बस सोच रहा था थोड़ा करियर सेट हो जाए। मैं देखता हूं अगर कोई मेरे लायक फॉर्म है तो मैं भरता हूं कोशिश करता हूं कि मेरी नौकरी हो जाए। अगर नौकरी हो जाती है तो हम लोग शादी कर लेंगे। नहीं तो ऐसे फजीहत हो जाएगी। डिंपल भी हामी भर देती है। सनी की किस्मत साथ देती है और उसकी नौकरी हो जाती है बैंक मे। 
              डिंपल खुश है। सनी कहता है – अब शादी कर ले? डिंपल – नहीं यार! मैं भी चाहती हूं कि मैं भी कुछ अच्छा कर लूं और अब तो घर वालों का शादी के लिए भी प्रेशर नहीं है। क्या जाकर कहूं? मुझे शादी करनी है, नहीं! मैं ऐसा नहीं कर सकती उनकी उम्मीदें हैं बहुत मुझसे। मैं चाहती हूं मैं अपने कैरियर को एक नया आयाम दूं। सनी – अच्छा ठीक है लेकिन अब नौकरी लग गई है तो मुझे जाना होगा। दोनों चले जाते हैं लेकिन पता नहीं क्यों डिंपल के मन में सनी को लेकर शक पैदा हो जाता है। उसे लगता है सनी वहां नौकरी करेगा इतना खुश मिजाज लड़का है, इतना खूबसूरत किसी का भी दिल आ जाए। डिंपल के मन में इस तरह घर कर जाता है कि कितना भी उपाय के बावजूद डिंपल के मन से यह शक नहीं निकाल पाता। सनी के जाने के बाद डिंपल अक्सर उससे बात किया करती, फेसबुक और व्हाट्सएप पर भी चैटिंग होती रहती। इससे भी डिंपल का जी न लगता है आए दिन सनी पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहती। अच्छा देखा था मैंने तुम्हारे फेसबुक प्रोफाइल वह लड़की कौन थी? सनी – अच्छा! इतनी जलन ठीक नहीं। वह मेरी कलिग है। डिंपल – अच्छा! कलिग है तो तुम उससे बात ही क्यों किए? शायद तुमने ठीक से देखा नहीं यार वह एक बर्थडे पार्टी थी। अच्छा जब मैं कहती थी तब तो तुम्हें पार्टियां पसंद नहीं थी और अब बर्थडे पार्टी मनाई जा रही हैं। सनी – यार! समझने की कोशिश करो। ऑफिस में अचानक से प्रोग्राम बन गया। ऑफिस में हूं तो यह सब करना पड़ता है। डिंपल चिढ़ जाती हैं – अच्छा! कॉलेज में तो कहते थे क्लास नहीं छोड़ सकता और यहां नौकरी छोड़-छोड़ का पार्टियां सेलिब्रेट कर रहे हो रहने भी दो। बहस इतनी लंबी हो जाती है कि सनी को लगता है कि माफी मांग लेनी चाहिए। सनी कहता है माफ कर दो अब कोई पार्टी नहीं। डिंपल अच्छा ठीक है।
             कुछ समय बाद जब सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है एक दिन डिंपल सनी का प्रोफाइल चेक करती है। वह देखती है सनी कुछ लड़कियों से घिरा हुआ है वह उसी समय सनी को फोन लगाती हैं और बोलती है – तुमने तो कहा था कि अब कोई पार्टी नहीं यह कौन लड़कियां हैं? मैंने देखा तुम्हारे फेसबुक प्रोफाइल पर। सनी थोड़ा-सा सकपका जाता है - फेसबुक पर मेरी फोटो लड़कियों के साथ? हो ही नहीं सकता। तुम झूठ बोल रही हो। डिंपल – अच्छा! मैं झूठ बोल रही हूं? मैंने देखी है। तुमने ही तो बताया था वह तुम्हारा दोस्त है। मैंने देखा वहां पर तुम ढ़ेर सारी लड़कियों से घिरे हुए थे। तुम्हारे फेसबुक प्रोफाइल पर नहीं। तुमने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पिक नहीं डाली बल्कि तुम्हारे दोस्त ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पिक डाली है। मैं उनके भी प्रोफाइल चेक करती हूं। कौन-सा दोस्त? अभिषेक। अरे यार, वह मेरा फ्रेंड थोड़े ही है। अच्छा तो अब वह तुम्हारा फ्रेंड भी नहीं रहा? नहीं यार, बात वह नहीं है। तो तुम कहना क्या चाहते हो वह तस्वीरें झूठी हैं? उसने कल ही तो  पोस्ट की है। पर वह पार्टी की नहीं है। अच्छा! तो किस खुशी में गया था फोटो खिंचवाने के लिए? सनी समझ ही नहीं पाता कि वह क्या बोले, बोलता है – ऑफिस का काम था। हमलोगो को कैंपेनिंग करनी थी उसी का पिक्चर डालना था। इसीलिए उसने डाल दी फेसबुक पर। इसमें मेरी क्या गलती है? वह पार्टी तो नहीं हो सकती अब कैंपेनिंग करना तो मजबूरी ही है ना? अब यह न करो तो नौकरी ही छोड़नी पड़ेगी। डिंपल चिढ़ते हुए – अच्छा! कैंपेनिंग में जरूरी होता है कि लड़कियों के साथ तस्वीरें खिंचवाई जाए? तुम चाहते तो उसे avoid कर सकते थे लेकिन तुम तो बहुत खुश हो। मैं यहां रात-दिन चिंता में मरी जा रही हूं और तुम वहां पर अय्याशी कर रहे हो। ठीक है मैं समझ गई अब तुम नौकरी करते हो। तुम्हें मेरी जरूरत नहीं। तुम्हें नहीं पड़ी है तो मुझे भी नहीं पड़ी। सनी को भी गुस्सा आ जाता है उसे लगता है डिंपल तो इतनी समझदार थी अब इसे क्या हो गया है? बात-बात में गुस्सा करने लगती है। वह भी गुस्सा में फोन कट कर देता है। डिंपल सोचती है अरे यार किस मनहूस घड़ी में इसे नौकरी करने के लिए बोल दी। इससे अच्छा तो वह यहीं पर M.A कर रहा होता। कम से कम हमलोग साथ होते। आजकल की लड़कियां जवान छोकरा देखा  नहीं कि लाइन मारना शुरू कर देती हैं। मैं क्या करूं और वह अपने घर वालों से परेशान जब मैं शादी नहीं करना चाहती थी तो रोज-रोज कोई न कोई प्रस्ताव लाकर मेरे सामने पटक देते थे। आज जब मैं सोचती हूं कि कोई प्रस्ताव आए ताकि मैं उनका प्रस्ताव ठुकरा कर सनी का प्रपोजल मैं उनके सामने रख सकूं, अब तो किसी को मेरी शादी की चिंता ही नहीं पड़ी है। मैं क्या करूं? देखते ही देखते सनी और डिंपल का रिश्ता तार-तार होने लगता है। वह बहुत दुःखी रहने लगती है। सनी उसे बार-बार समझाता है यह सही नहीं है तुम्हारा शक एक दिन हमारे रिश्ते को खत्म कर देगा और डिंपल लाख समझाने के बाद भी वही गलतियां करते रहती है।
               सनी को भी गुस्सा आ जाता है और एक दिन डिंपल से कह देता है – चाहे कुछ भी हो यार हम दोनों साथ नहीं रह सकते हैं। तुम्हारा तो नहीं पता लेकिन मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकता।  शक हम दोनों को जीने नहीं देगा और तुम्हारे बिना यह जिंदगी बर्बाद है। अब कुछ समझ में ही नहीं आता क्या करूं? शायद प्यार करना ही गलत था। डिंपल की आंखों से आंसू गिरने लगते हैं उसे समझ ही नहीं आता कि वह क्या कहें वह बोलती है – चलो हम दोनों एक दूसरे से वादा करते हैं। सनी - कैसा वादा? अब तो कुछ बाकी ही नहीं रहा। अब कैसा वादा? डिंपल – क्या अब मैं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं रही? डिंपल की यह बात सुनकर सनी अंदर से ही कहीं हिल जाता है और बोलता है – मैं तुम्हारे बिना कुछ नहीं हूं तो तुम कैसे कुछ नहीं हो? पर तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूं प्लीज तुम शक करना बंद कर दो। डिंपल – ठीक है आज से मैं शक करना बंद कर देती हूं लेकिन तुम भी लड़कियों से बात करना बंद कर दो। सनी – अजीब बात है अब नौकरी है तो कभी ना कभी बात करनी ही पड़ती है। लेकिन मैं तुमसे वादा करता हूं अगर अपने कलिग के अलावा और किसी से बात की तो मुझसे रिश्ता तोड़ देना। डिंपल भी खुश हो जाती है।
             एक दिन डिंपल कि सहेली सोनाली उसके घर आती है क्या यार क्या चल रहा है? डिंपल कुछ नहीं बस सब अच्छा चल रहा है। सोनाली – सुना है सनी की नौकरी हो गई है? डिंपल - हां job में है वह मुंबई में। सोनाली – ओ! मुंबई की लड़कियां? अरे यार तुम थोड़ा उस पर ध्यान रखा करो। डिंपल का दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है, वह अपना मन मारते हुए  वह बोलती हैं – नहीं-नहीं सनी ऐसा नहीं है। डिंपल अपने प्यार को भला कैसे गलत कह दे। सोनाली – हां! हां! हां! सनी तो ऐसा नहीं है। मैं जानती हूं, लेकिन मुंबई की लड़कियां छोटे-छोटे कपड़े पहन कर सामने आएगी तो बेचारा लड़का क्या करें? डिंपल का दिल और जोर जोर से धड़कने लगता है बोलती है – मैं क्या करूं यार? तुम ही बता दो। सोनाली – अगर तुम्हें लगता है सनी तुमसे प्यार करता है तो तुम उसे कुछ दिन फोन ना करो तुम्हें खुद ही पता चल जाएगा। अगर वह तुम्हारे प्यार में पागल है तो तुम्हें खुद ही फोन करेगा। डिंपल अच्छा अगर नहीं किया तो? सोनाली इसका मतलब है किसी और के चक्कर में है। डिंपल फोन नहीं करती है। सनी बेचैन हो जाता है सोचता है जो लड़की दिन-रात मेरे पीछे पड़ी रहती थी हमेशा फेसबुक व्हाट्सएप पर लगी रहती थी उसे हो क्या गया है? मेरे फोन करने पर भी कोई जवाब नहीं दे रही। अंततः वह थक हार कर डिंपल के घर पर फोन करता है। फोन डिंपल की मां उठाती है – हां! हेलो कौन? नमस्कार आंटी मैं सनी बोल रहा हूं। हां बेटा, कैसे हो? खुश रहो। मैं ठीक हूं काफी दिन हो गए सोचा आप लोगों की खैरियत ले लूं। डिंपल कैसी हैं? सब कुछ ठीक है ना? डिंपल की मां – हां, बेटा सब खैरियत है। डिंपल अभी अपने दोस्त सोनाली से बात कर रही है। डिंपल की मां जोर से चिल्लाती है डिंपल नीचे आ जाओ बेटा देखो सैनी का फोन आया है। डिंपल दौड़ती, कूदती, उछलती पता नहीं कितने रंग भरे थे उसकी आंखों में। वह सोनाली को गलत साबित कर दी थी उसका आशिक, उसका प्रेमी सिर्फ और सिर्फ उसका है। फोन को थोड़ा रोआब से उठाती है – हां, हेलो! सनी के गुस्से का ठिकाना ना रहता है बोलता है जब सब कुछ ठीक है तब तुमने फोन क्यों नहीं किया? चलो फोन नहीं किया लेकिन कम से कम फोन तो पिक कर लिया होता। कह देती मैं बिजी हूं। डिंपल – अरे यार कुछ दिनों से सोनाली आ जाती है तो मैं अपना फोन देख नहीं पाती बस इतनी सी छोटी बात के लिए गुस्सा होने का क्या मतलब बनता है? सनी को भी अपने गुस्सा पर थोड़ा शर्म महसूस होती है सोचता है मैं हमेशा चाहता था मुझे स्पेस चाहिए और आज यह लड़की स्पेस दे रही है तो मैं बिना मतलब के इस पर गुस्सा हो रहा हूं। वह बोलता है - हां हां मुझे माफ कर दो। मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था लेकिन तुम दिन-रात फोन करते रहती थी और आज एक बार भी बात नहीं हो पा रही थी तो मैं बेचैन हो गया था। कोई बात नहीं तुम आराम से सोनाली से बात करो। सोनाली डिंपल से - फोन किया था? डिंपल – हां! सुबह से ही फोन कर रहा था। जब मैंने फोन पिक नहीं किया तब उसने घर वाले नंबर पर कॉल किया। सोनाली – सोच रहा होगा कि बैठ कर रो रही होगी इसीलिए कॉल किया होगा। तुमने बोल दिया तो तुरंत में कैसे नार्मल हो गया। नहीं-नहीं मुझे यह लड़का ठीक नहीं लगता। डिंपल के मन में सोनाली पता नहीं क्या-क्या भर देती है? डिंपल हर दिन सनी से झगड़ा करते रहती है। सनी एक दिन सोच लेता है चाहे अब कुछ भी हो भले ही पूरी जिंदगी अकेले ही रहना पड़े लेकिन अब मैं इस लड़की से शादी नहीं कर सकता। प्यार सबसे बड़ी चीज है लेकिन जिंदगी जीने के लिए भरोसा नाम की कोई चीज भी होती है, शायद अब हमारे रिश्ते में वह भरोसा नहीं रहा। वह डिंपल को फोन करता है – यार मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं। डिंपल - क्या बात है बोलो? सनी – आए दिन तुम्हारा शक करना और मेरी नई-नई परीक्षाएं लेना, अब मैं इन सब चीजों से ऊब गया हूं। अब हमारे बीच वह भरोसा नहीं रहा जिस पर यह रिलेशन टिका था जब भरोसा ही नहीं रहा तो अब रिलेशन भी नहीं रह सकता। I am sorry मुझे नहीं लगता अब हम साथ रह सकते हैं। डिंपल के आंखों में आंसू आ जाते हैं – तुम्हें ऐसा क्यों लगता है? क्या मैं तुम्हें प्यार नहीं करती? सनी – प्यार अलग चीज है और भरोसा अलग। आप जिससे प्यार करते हैं उससे अगर शादी ना भी हो तो भी आप जिंदगी जी सकते हैं लेकिन जिस पर भरोसा ना हो उससे शादी कर ली तो definitely जिंदगी खराब ही बीतेगी। मैं तुम्हारी यादों में तो जी सकता हूं लेकिन तुम्हारे साथ नहीं। I am so sorry. सनी और डिंपल का रिश्ता तार-तार हो जाता है एक अनचाहे बुनियाद पर अनचाहे शक पर।

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