आओ नेतृत्व करे

              रूपाली चिल्लाते हुए - मां मेरा नाश्ता कहां है। मां - अभी लाती हूं। रूपाली कुछ सोचते-सोचते टीवी ऑन कर देती है। रुपाली के चाचा - क्या बेटा कॉलेज जा रही हो? रूपाली - हां चाचा जी कॉलेज जा रही हूं। टीवी पर न्यूज़ आते रहता है। राजनीति कितनी गंदी हो गई है न चाचा जी? नहीं बेटा, यह तो शुरू से ही गंदी थी, बस लोगों के देखने का नजरिया है। अच्छा, नहीं पहले तो ऐसे-ऐसे संवाद नहीं बोले जाते थे। मर्यादाओं का ध्यान रखा जाता था लेकिन आजकल तो इतनी गंदी बातें बोली जाती हैं कि मन करता है न्यूज़ चैनल चेंज कर दूं। हम लोग क्या उम्मीदें करते हैं और क्या देखते हैं समाज में, अजीब लगता है। चाचाजी - नहीं बेटा ऐसा नहीं है। पहले भी चीजें ऐसी थी। राजनीति में चीजें अच्छी और बुरी दोनों दो तरह की हैं। लोग बस फेमस होना चाहते हैं सोचते हैं जितना ज्यादा चेहरा चमकेगा उतना ही मुझे फायदा होगा। इसीलिए अच्छे से अच्छे लोग भी कभी-कभी ऐसी बातें बोल देते हैं जिस पर वाद-विवाद और चर्चा-परिचर्चा होने लगती है। पहले भी ऐसी चीजें थी लेकिन आजकल सोशल मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कारण यह इतनी ज्यादा ऊंचाई तक पहुंच गई है। उफ! आपको क्या लगता है चाचा जी? क्या कहना चाहती हो मेरी बच्ची? कुछ नहीं बस मैं यह पूछना चाहती थी की राजनीति अच्छी है या बुरी? यह बात तो मैं तुम्हें बता सकता हूं लेकिन सोच रहा हूं शुरू करू तो कैसे? मतलब, यह इतना मुश्किल है? नहीं, मुश्किल वाली बात तो कुछ नहीं है। पर मैं यह समझना चाहता हूं कि तुम किस नजरिए से राजनीति को देखना चाहती हो?
                  आप कहना क्या चाहते हैं चाचा जी? बात साफ है रुपाली अगर तुम पॉलिटिक्स में जाना चाहती हो तब मैं तुम्हें अलग तरीके से समझाऊंगा और अगर तुम सिर्फ राजनीति समझना चाहती हो की पॉलिटिक्स क्या है तब मैं तुम्हें दूसरे ही तरीके से समझाऊंगा। रूपाली थोड़ी सोच में थोड़ी गहरी सोच में अच्छा राजनीति करने और समझने में इतना बड़ा अंतर है? हां मेरे बच्चे राजनीति समझने और करने में बहुत बड़ा अंतर है। जब आप राजनीति को समझना चाहते हैं तब आप सिर्फ विचारों को समझना चाहते हैं, जिस भी पार्टी के विचार आपको अच्छे लगते हैं आप अपने आपको उस में समर्पित कर देते हैं। परंतु जब आप राजनीति करना चाहते हैं आप खुद को विधायक और सांसद बनाना चाहते हैं तब आपको वह सारी चीज़ें और सारे स्किल सीखने पड़ते हैं जिससे आप ऊपर जा सके। चाचा जी मुझे तो हमेशा लगता था कि लोग अगर अच्छा काम करें तो लोग उन्हें पूजते ही हैं। हां! यह सही है लेकिन जितना तुम सोचती हो उतना भी सही नहीं है। अगर ऐसा ही होता तो बहुत सारे समाज सेवी हैं वह सब राजनीतज्ञ नहीं हो जाते? हां यह बात तो आपने ठीक कही लेकिन यह भी तो हो सकता है कि वह राजनीति नहीं करना चाहते हो? चाचा जी मुस्कुराने लगते हैं अच्छा जो समाजसेवी होते हैं वह राजनेता नहीं बनना चाहते हैं, ये तुम्हें कैसे लगता है? रूपाली थोड़ा अचंभित-सा कि यह क्या बात हुई जो समाजसेवी है वह  राजनीति में आना चाहते हैं, तो वह समाज सेवा क्यों कर रहे हैं? हां यही सवाल तो मैं तुमसे पूछना चाहता हूं मेरी बच्ची। तुम्हें क्या लगता है? कोई समाज सेवा क्यों करता है? कोई उसे जाने। लोग अगर उसके अच्छे कामों के लिए जानते हैं, तो लोग चाहते कि उसे सत्ता मिले, ताकि वह चीजों को बदल सके। फिर वह पॉलिटिक्स में कैसे नहीं आना चाहता? हां, हो सकता है। हर कोई चाहता है। हां यही तो बात है, यही तो मैं तुमसे जानना चाहता हूं कि तुम क्या चाहती हो तुम पॉलिटिक्स समझना चाहती हो या तुम खुद पॉलिटिक्स करना चाहती हो?
                   रूपाली  की मां - नाश्ता तैयार है। ओ हां! कॉलेज के लिए देर नहीं हो रही है? हां मां बस चाचा जी से यूं ही बात कर रही थी। अच्छा जल्दी कर वरना लेट हो जाएगा। रूपाली अपना नाश्ता करते-करते - चाचा जी आपके अनुसार पॉलिटिक्स करना अलग बात है और पॉलिटिक्स समझना अलग बात है। हां रूपाली बिल्कुल, तुमने बिलकुल ठीक समझा। मैं ऐसा ही समझता हूं। पॉलिटिक्स समझने की क्या बात है? ‌ देखो जब आप पॉलिटिक्स को समझते हैं यानी राजनीति को समझते हैं तब आप किसी एक विचारधारा से चाहे वह कांग्रेस की हो या बीजेपी की या फिर अन्य कोई पार्टी क्षेत्रीय पार्टी की तो  अगर आप उसकी विचारधारा से सहमत होते हैं तब आप उसको सपोर्ट करते हैं। चाहे वह सहमति किसी भी विचारधारा से आए। साधारण सी बात है कांग्रेस 60 सालों से राज कर रही है। इसका मतलब यह है कि बहुत सारे लोग कांग्रेस के विचारधारा को सही मानते हैं। बहुत से ऐसे राज्य हैं जहां बीजेपी की सरकार है, इसका स्पष्ट मतलब है कि वहां के लोग बीजेपी की विचारधारा को सपोर्ट करते हैं लेकिन बहुत से ऐसे भी राज्य हैं जहां क्षेत्रीय पार्टियों का राज है। वहां के लोग क्षेत्रीय पार्टियों की विचारधारा को सपोर्ट करते हैं और उन्हें वोट करते हैं। वह पार्टियां उसके अनुसार काम करती है। अब तुम्हारी नज़र से वह काम सही और गलत हो सकता है, लेकिन वहां के लोगों को वही काम सही लगता है। इसलिए वह उस विचारधारा को सपोर्ट करते हैं वैसे नेताओं को चुनते हैं, अपना प्रतिनिधित्व बनाते हैं।
                    रुपाली कुछ सोचते हुए मैंने तो कभी ऐसा सोचा नहीं कि मैं राजनीति करूंगी या नहीं लेकिन अगर कभी करना चाहूं तो आपको क्या लगता है, तब मुझे क्या करना चाहिए? रूपाली के चाचा - साधारण सी बात है अगर आप राजनीति करना चाहते हैं तो सबसे बड़ी बात कि आपको कितने लोग जानते हैं? आपको लोग कैसे जानेंगे? यह सबसे बड़ा प्रश्न है। इसके लिए जरूरी है कि आप लोगों से मिले। जिस राज्य में आप राजनीति करना चाहते हैं वहां के लोगों की समस्याओं को समझें, सुने तभी आप उन समस्याओं को लेकर आगे बढ़ सकते हैं। तभी लोग आपके साथ खड़े हो सकते हैं। हर राज्य में अलग-अलग समस्या होती है। रूपाली - यह सारी समस्या तो हमें न्यूज़ चैनलों के माध्यम से पता चल ही जाता है, वही तो है। उसके चाचा जी मुस्कुराते हैं - नहीं मेरी बच्ची, टीवी चैनलों पर तो वह समस्याएं दिखाते हैं जो वह दिखाना चाहते हैं। वास्तविक समस्याएं तो दम तोड़ती हैं धरना स्थलों पर जिसे कभी-कभी हीं दिखाया जाता है। पीड़ित तो वहां मिलते हैं, समस्याएं तो वहां मिलती हैं यहां कुछ नहीं मिलता। यहां तो पार्टी का वर्चस्व मिलता है जो सत्ता में है या उसके खिलाफ है जिसके बारे में बोला और सुना जाता है, लेकिन अगर आप जीरो से स्टार्ट कर रहे हैं तब आपको कुछ अलग करना होगा और जनता जिसकी नेता वही। जनता जिसकी होगी नेता वही बन सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी यह है कि आपको अपने राज्य की छोटी-छोटी समस्याओं से अवगत होना होगा और इसकी जानकारी आपको धरना स्थल के अलावा अन्य कहीं नहीं मिलेगा। हर रोज दूरदराज इलाकों से लोग आते हैं अपनी समस्याओं को लेकर और धरना देते हैं, प्रदर्शन करते हैं उनकी समस्याओं को सुनों और अपनी बुद्धि से उन्हें हल करो। तब जाकर तुम उनकी नेता बन सकती हो और तब तुम्हें समझ में आएगा राजनीति क्या होती है। इन टीवी चैनलों और फेसबुक ट्विटर से राजनीति नहीं होती है। हमें जमीन पर खड़ा होकर काम करना होता है। उन सभी लोगों के बीच रहना पड़ता है, जिनके वोट हमें चाहिए।
          रूपाली का नाश्ता खत्म हो जाता है। वह चाचा जी से कहती है -आज आपसे बात करके बहुत अच्छा लग रहा है। मैं इस टॉपिक को तो यहां बंद नहीं करना चाहती लेकिन मैं क्या करूं मैं कॉलेज के लिए लेट हो रही हूं। मैं अब चलती हूं। चाचाजी – अच्छा! लेकिन मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता हूं। रुपाली – जी! कहीये। चाचाजी - तुम्हें लगता है कि तुम्हें राजनीति करनी है? रूपाली मुस्कुराती है - पता नहीं? मुझे करनी है या नहीं बस यूं ही सोच रही थी कि पता नहीं क्या होता होगा उन धरना स्थल पर लोगों को कैसे समझाया जाता होगा? पता नहीं क्या-क्या अभी मेरे दिमाग में चल रहा है? चाचा जी रूपाली की तरफ देखते हुए - मेरी बच्ची हर समस्या का समाधान होता है और वह समाधान आपकी बुद्धि में हैं।'जब किसी समस्या का समाधान कोई नहीं ढूंढ पाता और आप उस समस्या का समाधान ढूंढ़ लेते हैं तभी आप समझ जाइए कि आप नेता हैं।' रूपाली मुस्कुराते हुए वहां से निकल जाती है।
                रूपाली जब कॉलेज पहुंचती है तो वह देखती है कॉलेज में बहुत सारी लड़कियां प्रदर्शन कर रही हैं अपने टीचर के खिलाफ़। रूपाली को तो पहले कुछ समझ नहीं आता है। वह अपने दोस्त से - अरे यार यह हो क्या रहा है? तुम्हें नहीं पता? नहीं! ये लोग ऐसे हल्ला क्यों कर रही हैं? सामने से नेहा - हां-हां तुम्हें क्या पता है? तुम्हें खबर भी है रिजल्ट आया? रूपाली - क्या रिजल्ट आ गया? मुझे तो कुछ खबर ही नहीं थी। निरूपा - अच्छा तुम्हें कोई कोई खबर ही नहीं थी रिजल्ट आ गया है पर हम लोगों का नहीं। रूपाली क्या बात करती हो रिजल्ट आ गया है पर हम लोगों का नहीं क्यों? मोनिका - ओ हो क्या बताऊं तुम्हें यह यूनिवर्सिटी वालों ने इतना गड़बड़झाला किए हैं कि क्या बताएं? आया है अभी साइकॉलजी का रिजल्ट किसी को दो नंबर 4 नंबर 5 नंबर पता नहीं किस हिसाब से नंबर बैठा दिया है? ये लड़कियां कॉपी रिचेक करने के लिए हल्ला कर रही हैं। हिंदी और हिस्ट्री के तो रिजल्ट ही नहीं आए हैं। जितने के भी रिजल्ट आए हैं उनमें किसी को पास ही नहीं किया गया है। मुझे तो लगता है कुछ ना कुछ गड़बड़ी है। यही कारण है कि यह लड़कियां हल्ला कर रही हैं। यह तो 2 घंटे से चल रहा है। रुपाली - तुम्हें नहीं लगता हम लोगों को कुछ करना चाहिए। हमें जाकर प्रिंसिपल से बात करनी चाहिए। कमला - अच्छा हमें जाकर प्रिंसिपल से बात करनी चाहिए। ये जाकर बोली है अभी सही बात, महारानी अभी आई है और किसी को तो पता ही नहीं था कि प्रिंसिपल से जाकर बात करनी चाहिए। रूपाली गुस्से में - क्या मैं गलत बात बोल रही हूं? तुम्हें क्या लगता है प्रिंसिपल नहीं बात करेंगी? स्वाति - मुंह चिढ़ाते हुए हां-हां हम लोग तो बैठकर झाल पीट रहे हैं ना हरमुनिया और तान दे रहे हैं अरे यार सुबह से तो यही कोशिश कर रहे हैं। एक तो प्रिंसिपल अभी आई है, बैठी है; अपने चेंबर में, ऊपर से किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा, इसलिए लड़कियां कैंपस में हल्ला कर रही हैं। तुमको तो पता है कनक वर्मा किसी कि सूनती नहीं हैं। वहां पर गार्ड को बैठा दिया है। किसी को घुसने भी नहीं दिया जा रहा है। बस एक बार आईं थीं तपाक से बोल कर चली गई जितना पढ़ोगे उतना ही नंबर आएगा ना। मन तो किया उनके मुंह पर ही बोल दूं आप कितना पढ़ी थी कि आपको इस कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया गया। ओ हो यार आजकल सभी सेटिंग से ही आते हैं किसी को किसी का value ही नहीं है। रेणुका – हां-हां यहां किसी को किसी का कुछ value ही नहीं है। यह लोग कुछ देर हल्ला करेंगी और चुपचाप यहां से चली जाएंगी। तभी रूपाली तुम्हें नहीं लगता हम लोग को कुछ करना चाहिए। तभी नेहा बोलती है - हम लोगों को क्या मतलब है यार, हम लोगों का तो अभी रिजल्ट ही नहीं आया है। हम लोगों को कुछ बोलने का कोई मतलब ही नहीं है। क्या बात करती हो? रूपाली - क्या बात करती हो! मैं क्या बात करती हूं? हम लोगों को तो अभी और भी बोलना चाहिए क्योंकि हमारा अभी रिजल्ट नहीं आया है। उन लोगों का रिजल्ट आया है तो खराब आया है। आज अगर हम लोग उन लोगों के साथ खड़े नहीं होंगे तो वह लोग कैसे हमारी समस्या में खड़े होंगे? उधर से नेहा बोलती है यहां पर तो सभी के सभी नेता ही बने फिरते हैं। तुम्हें क्या लगता है तुम बोलोगी और वो लोग तुम्हारे साथ चली आएंगी? अच्छा! नहीं आएगी? हां! बिल्कुल नहीं आएगी। अगर तुम्हें सही लगता है तो जा कर देख लो। हां यह हो सकता है कि हम लोग भी जाकर जिंदाबाद-मुर्दाबाद करें। ओ! हो! यार ऐसे नहीं होगा हम लोगों को जाकर कोई और तरीका अपनाना होगा। कौन-सा तरीका? वही तो सोचना है जो सबसे अलग हो। अच्छा! क्या अलग करना है?
            स्वाति बोलती है मुझे तो इतना गुस्सा आ रहा है कि कैंपस के एक-एक गमले को फोड़ दूं तभी इन बहरे लोगों को हमारी आवाज सुनाई देगी। रूपाली कहती है – नहीं-नहीं यह तरीका सही नहीं है कॉलेज हमारा है और कॉलेज कि संपत्ति हमारी संपत्ति है। अगर हम लोग तोड़फोड़ करते हैं तो नुकसान हमारा ही है। रुखसार – अच्छा! हम लोगों को फेल किया जा रहा है तो इसमें किसका नुकसान है? जो भी हो हम लोगों को कुछ और ही सोचना होगा। रूपाली के दिमाग में चाचा की बातें कौंधने लगती हैं। 'अगर कोई समस्या का समाधान किसी से नहीं हो रहा है और तुम कर दो तो तुम ही नेता हो।' रुपाली का मन प्रफुल्लित हो जाता है वह सोचती है कि अगर मैं इस समस्या का समाधान कर दूं तो आज मुझे पता चल जाएगा कि "मुझमें नेतृत्व का गुण है या नहीं।" यह विचार आते हैं रूपाली का चेहरा चमकने लगता है। स्वाति - क्या बात है सभी यहां इतने दुखी हैं और तुम्हारा चेहरा इतना सुकून भरा है? रूपाली मेरे दिमाग में एक आइडिया आया है। नेहा - क्या बकवास बात कर रही हो यार? हमलोग चार-पांच क्या कर सकते हैं? रूपाली हम लोग चार-पांच नहीं हैं। हम लोग क्लासरूम के सारे लड़कियों को बुलाते हैं। स्वाति तुम्हें क्या लगता है वे लोग यह सब नहीं देख रही है, उन लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। वे लोग अपने सहपाठियों के पास जाती हैं - तुम्हें नहीं लगता है यह जो चल रहा है हमें कुछ करना चाहिए। लड़कियां - अरे यार! हम लोग इसमें क्या कर सकते हैं। यह लोग तो सुबह से हल्ला कर रही हैं मैडम को भी दिखता नहीं है। हम लोग तो बस यही कर सकते हैं कि हम लोग जाकर जिंदाबाद-मुर्दाबाद करें। बड़ा अजीब लगता है। अगर मैडम जान जाएंगी तो कॉलेज में रहना भी मुश्किल हो जाएगा। जब देखो धमकी देती रहती हैं सस्पेंड कर देंगे, यह कर देंगे; वह कर देंगे। हम लोगों को इन सब चीजों से थोड़ा दूर ही रहना चाहिए।
                         रूपाली का चेहरा गुस्से से तमतमा जाता है और वह चिल्लाते हुए कहती है – यही! यही! यही चीजें हैं जो हम लोगों को आगे नहीं बढ़ने देती एकता में बल है। यहां एकता नाम की चीज तो किसी में है ही नहीं। आज उन लोगों का रिजल्ट खराब हुआ है हम लोग का रिजल्ट आया ही नहीं और हम लोग बैठकर यह सोच रहे हैं की उन लोगों का घर जलता है तो जले हम अपना पानी क्यों बर्बाद करें? घर किसी का भी जल रहा है पानी बर्बाद नहीं हो रहा है। आग को बुझाना होगा नहीं तो वही आग की लपटें हमारे घर को भी जला देगी। आज उनका रिजल्ट खराब हुआ है तो हम लोग क्लास रूम में बैठे तमाशा देख रहे हैं, कल होकर हमारा रिजल्ट खराब होगा तो वो लोग क्लास रूम में बैठकर हमारा तमाशा देखेंगी; यह कब तक चलता रहेगा? मुझे लगता है तुम लोगों कि बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। मैं कुछ समझाना चाहता हूं लेकिन नहीं तुम लोगों के दिमाग में तो बस यह है कि यह हमारा काम नहीं है, इसीलिए हमें इससे कोई मतलब नहीं। हम लोग जो दिन भर बैठकर राजनेताओं पर विचार करते रहते हैं कि यह नहीं करते हैं वह नहीं करते। तुम लोग खुद के लिए क्या करती हो? वह लड़की जिनको तुम जानती हो उसके लिए कुछ नहीं करना। तुम लोग उनसे उम्मीद करती हो जो हमें जानते तक नहीं‌। फिर कैसे उम्मीद कर सकती हो कि वह लोग हमारे लिए कुछ अच्छा करें। पहले तुम खुद के लिए अच्छा करना सीखो, उसके बाद यह बकवास बातें मेरे सामने करना। रुपाली का गुस्सा देखकर सारी लड़कियां शांत हो जाती हैं। अच्छा रूपाली तुम ही बताओ हम लोग क्या करें? रूपाली का तो जैसे मन की मुराद पूरी हो जाती है - क्यों ना हम लोग जाकर रोड जाम करें? तब जाकर कुछ होगा। नेहा बोलती है - यह बहुत बकवास आइडिया है। मुझे नहीं लगता इससे कुछ होगा। रूपाली - एक बार तो हम लोग ट्राई कर ही सकते हैं न? हिंदी डिपार्टमेंट की लड़कियां - ठीक है चलो इसकी भी बात मान लेते हैं। वहां से निकलकर 10-15 लड़कियां रोड पर जाकर खड़ी हो जाती है। ट्रैफिक जाम हो जाता है उसे देखकर कुछ और लड़कियां भी आकर उनके पास खड़ी हो जाती हैं। लड़कियां उनके सपोर्ट में जाकर खड़े नहीं होती बहुत सी लड़कियां तो सिर्फ इसलिए जाकर खड़ी हो जाती है कि आखिर चल क्या रहा है? यह लड़कियां रोड पर क्यों खड़ी हैं? अंदर की कैंपस की लड़कियां जो अब तक जिंदाबाद-मुर्दाबाद कर रही थी उनमें कौतूहल हो जाता है आखिरकार उनका नेतृत्व किसने छीन लिया? वह लोग भी बाहर आ जाती हैं। वहां आकर उन्हें पता चलता है कि यह लोग भी मैडम से बात करना चाहती हैं। फिर सारी लड़कियां वहां खड़ा होकर प्रदर्शन करने लगती हैं।
                     ट्रैफिक जाम होने की वजह से ट्रैफिक एसपी वहां पहुंचता है। आप लोग क्या कर रहे हैं? आप लोगों ने सड़क जाम क्यों कर रखा है? रूपाली निडरता के साथ - सर हम लोग क्या करें? हम लोगों के कॉलेज का रिजल्ट आया है, कोई भी लड़की रिजल्ट से संतुष्ट नहीं है और मैडम हमारी बात सुनने को तैयार ही नहीं है। हम  student जाएं भी तो जाएं कहां इसीलिए हम प्रदर्शन कर रहे हैं। Traffic SP - यह आपके कॉलेज की समस्या है जाकर कॉलेज में सुलझाइए, इस तरह आपको रोड पर खड़ा होना सही नहीं है। रुपाली गुस्से में - सुबह से तो हम लोग कॉलेज में ही प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां तो कोई सुनता नहीं है। अब हम यहां प्रदर्शन कर रहे हैं तो आप हमें यहां से भगा रहे हैं तो हम लोग जाएं तो जाएं किसके पास आप ही बताइए? रूपाली के इस तरह के बर्ताव से ट्रैफिक एसपी का दिल धक-धक धक-धक जोरो से धड़कने लगता है। रूपाली के शब्द ट्रैफिक एसपी की धड़कन को बढ़ा देती है। ट्रैफिक एसपी को यह समझते देर ना लगी कि यह लड़की ऐसे तो हटेगी नहीं। ट्रैफिक एसपी रूपाली को धमकाते हुए - देखिए हमें थोड़ा सख्ती से पेश आना पड़ेगा। रूपाली - यहां लाशें बिछ सकती हैं पर यहां से हम उठने वाले नहीं हैं। ट्रैफिक एसपी को यह समझते देर न लगी कि बात अब कैरियर की है यह लोग मानने वाले नहीं हैं। अब हमें दूसरी तरकीब लगानी पड़ेगी। Traffic SP बड़े प्यार से - देखो बेटा! मैं तुम्हारी समस्या समझ रहा हूं, लेकिन यहां रोड पर खड़े-खड़े ही हम लोग तुम्हारी समस्या को solve नहीं कर सकते। तुम्हारी समस्या तुम्हारी प्रिंसिपल ही सॉल्व कर सकती हैं तो तुम्हें प्रिंसिपल से बात करनी चाहिए? रूपाली थोड़ा नरम पड़ते हुए  - यही तो हम भी चाहते हैं सर की प्रिंसिपल मैडम हमारी बात सुने और हमारे एप्लीकेशंस लें। वह यूनिवर्सिटी के लोगों से बात करें कि ऐसा क्यों हुआ है? हमें हमारे कॉलेज की सारी कॉपी रिचेक करानी है बस। ‌ सर आपको लगता है कि हमारी मांगे गलत है? ट्रैफिक एसपी - नहीं बेटा! आपकी मांगे बिल्कुल जायज़ है और यह काम एकदम होना ही चाहिए। अगर आपकी मैडम आप लोगों कि बात नहीं सुन रही हैं तो चलिए हम बात करते हैं।
                               Traffic SP प्रिंसिपल के चेंबर में आपके कॉलेज की यह समस्या है आपको नहीं लगता आपको कुछ करना चाहिए? प्रिंसिपल ट्रैफिक एसपी को देख कर थोड़ा घबड़ा जाती है और बोलती है नहीं-नहीं मैं तो अभी इस समस्या पर विचार कर ही रही थी। यह लोग तो बिना मतलब के रोड जाम करने चली गई। प्रिंसिपल के इस व्यवहार से रूपाली चिढ़ जाती है। रूपाली – अच्छा! आप सच में विचार कर रही थी तो क्या हम लोग बे फालतू के सुबह से प्रदर्शन कर रहे हैं? आपको नहीं लगता कि आप को कम से कम एक बार भी बाहर आकर यह बोलना चाहिए था कि हां बेटा आप लोग आराम से क्लास में जाइए हम आपके एप्लीकेशन ले लेते हैं। आपके आवेदन पर विचार किया जाएगा। आपने तो बस एक बार आकर बोल दिया कि जितना पढ़ोगे उतना ही नंबर आएगा ना। आपको क्या लगता है हम लोग बस इतना ही पढ़े हैं कि हमें जीरो और पांच नंबर मिले। बताइए आप क्या कहना चाहती हैं? रूपाली की बातें सुनकर कनक मैडम थोड़ा सकते में आ जाते हैं और तुरंत यूनिवर्सिटी में फोन लगाती है और एक्जाम कंट्रोलर का नंबर रूपाली को दे देती है। रूपाली को कहती है मैं यूनिवर्सिटी में बात करती हूं और आप लोगों को भी जो समस्याएं हैं आप बात कर सकती हैं। सभी लड़कियों के आवेदन लिए जाते हैं। बाहर आकर रूपाली सभी लड़कियों में नंबर बांट देती है। सभी लड़कियां मिलकर रूपाली का जय जयकार करने लगती हैं। सभी लड़कियों के चेहरे पर खुशी छा जाती है। तब रुपाली को लगता है -Yes, I Am A Leader.

Comments

  1. यह बहुत सुन्दर कहानी है, पढ़ते समय ऐसा महसूस होता है जैसे पड़ोस में ही घटी कोई घटना हो, रूपाली में मैं अपना ही अश्क ढूढ़ती हूं। यह कहानी मेरी कालेज के दिन को फिर से ताजा कर गयी। अपने हक के लिए लड़कियों को ऐसे ही लड़ना चाहिए। Thanks Mansi Yadav

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  2. यह कहानी पढ़ने के बाद मुझे एहसास होता है कि हर व्यक्ति में नेतृत्व का गुण होता है और हमें आगे बढ़ के समस्या का समाधान करना चाहिए। thnx mansi. एक नए नजरिए के लिए।

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  3. This is a fabulous story. In this era female belong anywhere like school college or parliament. She knew to fight for their right. Mansi Yadav your story present the real face of female.We are waiting for your story. You are trying to reform society through your story. Your story for new tug. My baby is also eagerly waiting for your story.

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