मां का सपना : बेटी ने सच किया
सुबह का वक्त था। धीरे-धीरे हवा चल रही थी। सनसनाती आवाजों में कुछ गूंज रहा था। स्वाति अभी कुछ समझ ही पाती की उधर से आवाज आती है। स्वाति!स्वाति! हां मां क्या हुआ? कुछ नहीं बेटा देख रहे हो पड़ोसी हल्ला कर रहे हैं। क्यों तुम तो झगड़े में नहीं हो न? ना-ना बेटा मैं क्यों झगड़ा करूंगी। वह लोग पता नहीं आपस में क्यो लड़ते रहते हैं? मुझे तो आज तक समझ मे नहीं आता जिस बेटे को इतनी मुश्किल से पढ़ाया लिखा है उसी से झगड़ा करने का क्या मतलब बनता है। रहने दो मां उन लोगों का तो रोज का काम है। तुम अपने काम पर ध्यान दो। हां हां हां तुम ठीक कहती हो। तुम क्या कर रही हो? कुछ नहीं अभी-अभी सुबह की ताजी हवा ले रही थी। अच्छा जल्दी करो तैयार हो जाओ कॉलेज नहीं जाना है? हां बस अब निकलने ही वाली थी, सोच रही थी जा कर नहा लू। हां-हां जाकर नहा लो मैं नाश्ता बना देती हूं। स्वाति तैयार होकर जब बाहर आती है। मां - इन दिनों मैं थोड़ी चिंतित हूं। किसलिए मां? सोच रही थी कि तुम कहीं अगर नौकरी कर लेती तो ठीक रहता। मेरे भी रिटायरमेंट के दिन नजदीक आ रहे हैं। तुम्हारा भी घर बस जाता तो अच्छा होता। ओफ! हां ये बात तो तुम बहुत दिन से कह रही हो। मैंने ही ध्यान नहीं दिया। अच्छा मैं सोच ही रही थी कि मैं अपने लिए कोई जॉब ढूंढ लूं, देखती हूं किसी से बात करके, अच्छा रहेगा। तभी स्वाति की मां की आंख छलक जाती हैं। कितने बुरे दिन हैं न? बुरे दिन कैसे? अगर तुम्हारे पापा होते तो मुझे तुमसे यह बातें नहीं कहनी पड़ती। क्यों? तुम ऐसा क्यों सोचती हो? तुमने पापा से कभी कम थोड़ी प्यार किया है। शायद मेरे पापा भी होते तो इतना प्यार कभी नहीं करते हैं जितना तुम मुझे करती हो। नहीं मेरी बच्ची एक बाप ना होने का दर्द मैं समझती हूं। लेकिन मुझे पता है तुमने कभी महसूस नहीं होने दिया मुझे। लेकिन मैं समझती हूं कि अगर तुम्हारे आज पिता होते तो जिंदगी और खूबसूरत होती। एक पति ना होना दुःख की बात है पर एक बाप का ना होना उससे भी ज्यादा बुरा है। मैंने देखा है तुम्हें चीजों के साथ compromise करते हुए। बदली है बहुत सारी चीजें तुमने अपनी जिंदगी में। मैंने भी बहुत कुछ खोया है पर तुमसे ज्यादा नहीं। ओहो! मां तुम फिर से शुरू हो गयी। मुझे किसी चीज की कोई परवाह नहीं है। नहीं-नहीं मैं जानती हूं तुम बहुत ही बहादुर हो तुम्हें, किसी चीज की जरूरत ही नहीं है। शायद मैं ही बिना मतलब में सोचते रहती हूं ठीक है तुम्हें जो लगता है करो लेकिन मैं चाहती थी कि थोड़ा जल्दी नौकरी कर लेती तो अच्छा होता। अच्छा मां मैं निकलती हूं शाम में आते हुए तुम्हें कुछ बताती हूं। देखती हूं क्या होता है? Ok bye love you bye. स्वाति की मां - love you. मैं भी ऑफिस के लिए निकल ही रही हूं। Love you bye. तुम्हें छोड़ दूं। नहीं-नहीं मैं चली जाऊंगी। OK bye mom love you.
स्वाति चली जाती है। तभी उसकी मां अधेड़बून में आगे बढ़ते हुए अपने कमरे में जाती है अपना पर्स उठाती है सोचती है क्या मिला मुझे? स्वाति के चलते ही तो उसके पिता से मैंने रिश्ता तोड़ा था लेकिन लगता है आज फिर उससे एक बार रिश्ता जोड़ लूं। क्या मुझे उस आदमी को माफ कर देना चाहिए जो मुझे छोड़कर किसी और के साथ रह रहा है? आज तक तो मेरी खबर नहीं ली। मुझे भी कितना गुरूर था मैं नौकरी करती हूं। मुझे क्या जरूरत है ऐसे इंसान की लेकिन अब वक्त बदल गया है स्वाति बड़ी हो गई है। उसे अब पिता की जरूरत है मेरी भी नौकरी रिटायरमेंट के कगार पर आ गई है। पता नहीं मैं उसके लिए लड़का ढूंढ पाऊंगी या नहीं? उसके पापा रहते तो लोगों को अच्छे से समझ पाते, पुछते, पता करते पर मैं क्या करूंगी अकेली जान? छोड़ो रहने दो। लड़ाई-झगड़ा तो अपनी जगह पर है।
मुझे एक बार उन्हें फोन कर ही लेना चाहिए, फोन उठाती हैं और अपने पति को फोन लगाती हैं। फोन की घंटी बजती है और फोन उसका पति ना हो उठाकर उसकी सौतन उठाती है – हां! हेलो कौन? उसका तो जी ही जल जाता है। मैं बताऊं, मैं कौन हूं? कमीनी कहीं कि तुम्हें नहीं पता, मैं कौन हूं? लगता है नंबर भी सेव करके नहीं रखते मेरा। स्वाति की मां सोचती है क्या बोलूं मैं इसे? मैं कौन हूं? कुछ नहीं कहती है और फोन रख देती है। ऑफिस के लिए निकल जाती है स्वाति बहुत खुश है अपने लाइफ में। कॉलेज जाती है – विकास! विकास – हां! हेलो! स्वाति। बोलो कैसी हो? अरे यार! मम्मी का रिटायरमेंट होना है और वो चाहती है PG कंप्लीट करते-करते मैं कोई नौकरी कर लेती। मुझे भी लगता है, मां का हाथ बटाना चाहिए। कोई जॉब मिल जाती तो अच्छा रहता। अरे यार मैंने तो तुम्हें 100 काम बताया 50 तो तुमने बिना देखे ही रिजेक्ट कर दिया और 50 को तुमने जाते ही ना कर दिया। मुझे नहीं लगता कोई काम तुम्हारे लिए बना है, तुम्हें जो ठीक लगता है करो। यार मैं मैनेजमेंट की स्टूडेंट हूं इसलिए मुझे उस तरह के काम पसंद नहीं आते। यार तू अपना कोई बिजनेस क्यों नहीं कर लेती? बिजनेस; हां सोचती तो हूं।
मैं अकेली हूं, तो वह काम नहीं कर सकती। पापा होते या कोई भाई होता; पता नहीं क्या-क्या मां बोलती है? पता नहीं लोग लड़कियों को इतना कमजोर क्यों समझते हैं। विकास मुस्कुराता हुआ स्वाति से कहता है - वाह! तुम्हारी मम्मी तुम्हें लड़की भी समझती है? यह तो मुझे अजीब बात लगती है। तुम्में तो कोई लड़कियों वाली बात ही नहीं है। अच्छा रहने दे। काश! मेरी मां के थॉट भी तुम्हारे जैसे होते तो मुझे इतना सुनना नहीं पड़ता। अच्छा! ओ! हो! तो चलो तुम्हारी मां के अंदर मैं अपना थॉट डाल देता हूं। कभी घर तो बुलाया करो। अच्छा तुम घर पर आओगे तो मेरी मां सोचेंगी कि मेरा टांका तुमसे भिड़ गया है और वह तो खुशी से नाचने लगेगी, बोलेगी काम धंधा छोड़ो इसे से शादी कर लो। मैं इन सब झंझटों में नहीं पड़ती मुझे लाइफ में आगे बढ़ना है। कुछ काम करना है। अच्छा तो शादी कोई काम नहीं है? होगा; पर मेरे लिए नहीं है। शादी एक पड़ाव है जिसे हर किसी को पार करना होता है। अच्छा; तो वह लड़की स्वाति नहीं है? नहीं-नहीं वह मैं हूं पर मुझे अभी उस पड़ाव को पार करने की जरूरत नहीं है। ऐसे मेरा तो शादी से जी ही उचट गया है। क्यों? तुमने देखा नहीं; पापा ने मां के साथ कितना गलत किया? छोड़ो यार रहने दो पुरानी बातों को। हां-हां है तो पुरानी बातें। आज मां कह रही थी। मैंने कभी उनको इतना कमजोर नहीं देखा, जितना आज। देखा मैंने मां को। कितनी दुःखी थी? बोल रही थी काश! तुम्हारे पापा होते। एक पति के बिना जिंदगी बिताना अलग बात है पर एक बाप के बिना लड़की का जिंदगी बिताना एक अलग बात है। पता नहीं क्यों वह अपने आप को इतना असहाय महसूस कर रही थी। मुझे समझ में नहीं आया मैंने क्या ऐसे गलती कर दी है जिसके कारण उन्हें ऐसा लगता है। नहीं-नहीं ऐसी बात नहीं है जिंदगी में कभी-कभी ऐसे पल आते हैं जब आदमी अपने फैसलों पर ही शक करने लगता है। उन्होंने जो किया वह सही था लेकिन तुम्हारे कारण या समाज के कारण उन्हें ऐसा लगता होगा कि काश तुम्हारे पापा होते तो अच्छा होता। वह है भी और नहीं भी। हां यह बात तो सही है मुझे कभी-कभी लगता है; मां दूसरी शादी कर लेती तो अच्छा होता। लेकिन उन्होंने मेरे कारण कभी दूसरी शादी नहीं की शायद कर ही लेना चाहिए था। मेरे ही कारण। आज अगर वो एक दूसरी शादी कर लेती तो शायद उनकी जिंदगी भी संवर जाती और आज जो डर है उनके अंदर वह ना होता मुझे लेकर; इसका कोई बाप नहीं है रहने दो सोतेला ही होता। सौतेला और अपना क्या होता है यार, अपने ही लोग तो पीठ में छुरा भोकते हैं दूसरों का क्या? मेरे पापा की जगह मेरे सौतेले बाप ने की होती तो मेरा भी मन संतुष्ट होता, लगता हां चलो ठीक है, मेरा तो बाप था नहीं इसलिए मेरे साथ ऐसा किया और देखो मेरा अपना बाप होके उसने मेरी तरफ कभी देखा नहीं। ऐसे इंसान से क्या उम्मीद करना कि वह मेरे जीवन में कुछ आगे कर सकते मुझे लगता है मेरे सपनों को लेकर। तुम तो जानते ही हो कितनी पढ़ी लिखी थी फिर भी कोई ढंग की नौकरी तो हुई नहीं प्राइवेट जॉब करती हैं उसमें भी मेरा खर्चा, घर का खर्चा, सब कुछ चलाती हैं। उसमें से कहां पैसा बचता है जो मुझे कुछ दे सके। पता नहीं बोल रही थी रिटायर हो रही हैं सरकारी नौकरी होती तो कुछ पैसे भी मिलते। ये प्राइवेट वाले ना बस देख लेते हैं, उम्र ढल गई है, अब क्या जरूरत है? बस निकालने के पीछे पड़ जाते हैं।
रिटायरमेंट क्या है? मां तो कितना अच्छा काम करती है, कोई मिल गई होगी सस्ते-सुस्ती में काम करने वाली। रहने दो मुझे कुछ करना होगा उनके लिए। विकास - तुम ठीक कहती हो यार, लेकिन तुम्हारी मां का एक्सपीरियंस भी तो काउंट होगा। वह कहीं कुछ और कर सकती हैं। क्या करेंगी? मुझे कुछ समझ में नहीं आता। तुम मैनेजमेंट कि स्टूडेंट हो, तुम्हें समझ में नहीं आता; कुछ सोचो उनके लिए। तुम्हारी मां है तुमने देखा है उन्हें अपनी जिंदगी में संघर्ष करते हुए, उन्हें तुम जानती हो वह क्या कर सकती हैं; क्या नहीं कर सकती हैं। यही तो मैनेजमेंट स्किल है। एक अच्छा मैनेजमेंट गुरु वही होता है जो आम आदमी से भी काम करवा ले। हां! हां! हां! तुम्हारी बकवास बातें मेरी समझ से परे हैं। कोई ढंग का काम मिलता है तो बोलो नहीं तो मुझे क्लास के लिए लेट हो रहा है। ओके यार मैं देखता हूं। सारी बातें खत्म होते ही स्वाति अपना क्लास करने के लिए अपने क्लास रूम में चली जाती है। क्लास रूम में क्लास चलते रहती है लेकिन उसका दिल नहीं लगता। वह सोचती है मां कितनी दुःखी थी आज, पता नहीं क्यों इतनी दुःखी थी? शायद उनके दुख का कारण मैं तो नहीं? हां, शायद मैं ही हूं। मैं क्या करूं उनके लिए? यही सोचते-सोचते क्लास खत्म हो जाती है और स्वाति घर आते-आते सोचते रहती हैं मैं क्या करूं? मैं क्या करूं ऐसा जो उनके लिए अच्छा हो?
स्वाति घर पहुंचती हैं। मां! ओह! मेरी बच्ची तुम आ गई? हां! मैं आ गई। क्या बोलूं आज ही उन्होंने मुझे निकाल दिया। बोला अब आप इतना अच्छे से काम नहीं कर पाती हैं जितना पहले करती थी, शायद मेरी आंखें कमजोर हो गई है इसलिए उन्होंने मुझे निकाल दिया है; है तो कितना भी प्राइवेट जॉब ना! क्या करूं समझ में नहीं आ रहा, लेकिन हम कुछ कर लेंगे तुम ज्यादा चिंता मत करो। तुम्हारी नौकरी का क्या हुआ, नौकरी के बारे में कुछ पता चला? ऊफ मां! कुछ खास तो पता नहीं चला है अभी मुझे, लेकिन तुम कुछ चिंता मत करो। कुछ दिनों में मैं कोई ना कोई नौकरी ढूंढ ही लूंगी। विकास ने तुम्हें कितनी बार नौकरी के लिए भेजा था। मैं कितना समझाते रहती थी, तुमने सुना नहीं कभी मेरी बात को। रहने दो मेरी बच्ची मैं कुछ कर लूंगी तुम ज्यादा चिंता मत करना। हां-हां हम दोनों मिलकर कर लेंगे। स्वाति की मां - मैं तुमसे कुछ बात करना चाहती थी। हां! बोलो ना! क्यों ना हम तुम्हारे पापा से बात करें? शायद वो तुम्हारे लिए कुछ देख सकते हैं, अच्छी नौकरी है उनकी। मैंने ही अपने गुरुर में उन्हें छोड़ दिया था, उन्हें न छोड़ती तो शायद हमारी जिंदगी इतनी खराब ना होती। शायद मुझे कुछ ज्यादा ही घमंड था उस समय लेकिन अब नहीं रहा। वक्त ने धीरे-धीरे मुझे इतना बदल दिया है।
मैं कभी सोचती भी नहीं थी, तुम 6 साल की थी, जब मुझे पता चला कि उनका चक्कर किसी और के साथ है। कितनी दुःखी हुई थी मैं? पता नहीं उस समय मुझे क्या सवार हो गया था जब उस ड्रॉर में मैंने उस औरत की फोटो देखी थी और मैंने उनसे इतना झगड़ा किया था। मैंने उनसे अलग होते हुए एक बार भी नहीं सोचा कि तुम्हारा क्या होगा? बस यही सोचा था इस आदमी से दूर चले जाना ही मेरे लिए सबसे अच्छी चीज है लेकिन आज एहसास होता है कि वो डिसीजन अगर थोड़ा सोच-समझकर कर लेती तो आज हम लोग यूं गुरबत भरी जिंदगी ना जीते होते। तुमने बहुत कुछ कंपरमाइज किया है मेरे कारण। तभी स्वाति - नहीं मां! तुमने जो किया ठीक किया तुम्हारी सिर्फ एक गलती मानती हूं जो आज भी मुझे लगता है। क्या मेरे बच्ची? अगर तुम शादी कर लेती तो ज्यादा अच्छा होता।
मां तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए थी, अगर तुम शादी कर लेती तो आज तुम अपने फैसले पर अफ़सोस ना करती होती। तुमने अपनी लाइफ में बहुत कुछ खोया है अलग बात है कि तुम्हें उसे खोने का एहसास नहीं है। वह रंगीन शामें वह खुशियां जो तुम्हें तुम्हारे पति से मिलती। वह कभी ना मिला। हमेशा दुःख और दुःख ही तुम्हारे जीवन का एक आसरा बन के रह गया। तुम्हें नहीं लगता कि तुम वह सब कुछ deserve करती थी, जो एक लड़की deserve करती है। उस समय तुम्हारी उम्र क्या थी तुम कितनी टैलेंटेड थी, इतनी पढ़ी-लिखी लेकिन अपने लाइफ में आगे ना बढ़ सकी। तुम्हारे ऊपर मेरा भार था। तुमने मुझे अपने से पहले देखा तभी मुझे अच्छे स्कूल में पढ़ाया-लिखाया और आज मैं एमबीए कर रही हूं। तुमने मुझे वह हर चीज दी, जो मुझे मेरा बाप नहीं दे पाता। वह आज़ादी, फ्रीडम तुमने मुझे दिया है वह मुझे कोई नहीं दे पाता मुझे। एक चीज का अफसोस है कि तुमने अपनी जिंदगी यूं ही बर्बाद कर दी। मुझे याद आता है वह लम्हा जब कभी तुम अकेले बैठ कर रोती थी, लेकिन नहीं जिससे तुम आज भी, तुम चाहती हो कि ठीक हो जाए।
तुम्हारा गुरूर, तुम्हारा घमंड, मुझे आज इतना मजबूत बनाता है। इस चीज को छोड़ दिया तो मेरी जिंदगी का आधार ही खत्म हो जाएगा। मेरा अस्तित्व खत्म हो जाएगा। स्वाति की मां की आंखें छलक उठती है। बोलती है नहीं बच्ची मैं थोड़ी, मुझे थोड़ी-सी कमजोरी महसूस हुई थी। मैं डर गई थी, तुम्हारे कारण कि कहीं मैंने कोई गलत फैसला तो नहीं ले लिया जिसके कारण आज मेरी बच्ची का भविष्य कहीं खत्म तो नहीं हो रहा है, लेकिन तुम जो बातें कह रही हो उससे मुझे आज एहसास होता है कि नहीं मैं वापस तो नहीं जाऊंगी। अगर तुम्हें लगता है मेरे वापस जाने से तुम्हारा, तुम्हारे अंदर का जो अस्तित्व जो खत्म हो रहा है तो मुझे नहीं लगता कि मैं तुम्हारे लिए उस इंसान से अलग हुई थी। मैं नहीं चाहती थी कि अपने पिता को यूं बटते हुए देखों, मेरी इच्छाओं को मरते हुए देखो क्योंकि आदमी अपने पति से दूर रहके के तो अपनी जिंदगी व्यतीत कर सकता है लेकिन अपनी सौतन के साथ रहकर कभी खुशियों में भागीदारी नहीं ले सकता है। खुशी क्या है? खुशी क्या है मेरी बच्ची? खुशी तो वह है जो मन को प्रफुल्लित करें। खुशी वो नहीं जो हमें पैसों से मिलती है। पैसा क्या है? पैसा तो हर कोई कमा लेता है। मैं भी कभी जिंदगी में सोचती थी मैं कुछ करूंगी, कुछ बेहतर करूंगी। मैं इतने पैसे कमाऊंगी कि तुम्हारा बाप कभी कमा नहीं पाएगा। इतनी शोहरत होगी मेरे कदमों में जितना तुम्हारे बाप को कभी मिल नहीं सकती। हां! 'पर मैंने कुछ खोया है उम्मीदों के चक्कर में बहुत कुछ खोया है, तुम्हें बनाने के चक्कर में।' मुझे समझ में नहीं आता था कि मैं क्या करूं? मैंने बहुत बार आगे बढ़ने की कोशिश की पर बहुत बार मुझे अपने कदम पीछे लेने पड़े है क्योंकि जिंदगी में हर चीज आसानी से नहीं मिलती। मैंने बहुत बार अपने आप को संवारने के चक्कर में खुद को टूटते हुए देखा है इसीलिए आज मैं इतनी नाराज खुद से।
मैं तुमसे नाराज नहीं हूं ना मैं अपने उस decision से नाराज हूं लेकिन हां क्योंकि मैं कामयाब नहीं हूं तो मैं अपने आप से नाराज हूं, इसलिए आज मेरा घमंड भी टूट रहा है। मेरे अंदर जो कुछ भी था वह ढ़ह रहा है, जैसे सर्द दीवारों में, जैसे सर्द दीवारों की ताकत कमजोर हो जाती है और एक हल्का-सा झटका उसे तोड़ जाता है उसी तरीके से मुझे तोड़ दिया है। उसी तरीके से इस नौकरी ने मुझे तोड़ दिया है और मुझे उल्टी-सीधी चीजें सोचने पर मजबूर कर दिया है। तुम ठीक कहती हो हम दोनों मिलकर कुछ अच्छा कर सकते हैं। मैंने गलती कर दी मैंने अपने गूरूर में गलती कर दी। मैंने शादी नहीं की। मुझे कर लेनी चाहिए थी शादी ताकि मैं अपनी खुशियों के साथ-साथ तुम्हारी खुशियों की बलि न चढ़ाती। तुम्हें भी एक बाप का प्यार मिलता। तुम ठीक कहती हो, हर इंसान को आगे बढ़ाने का हक है तो उसे वह हर चीज़ की खुशी महसूस करने की। जब कोई आपका पार्टनर आपको धोखा देता है और वह यह सोचता है कि आप अकेली लड़की है आप आगे क्या कीजिएगा बहुत तो यही होगा तालाक दीजिएगा। लेकिन शायद अगर मैं शादी कर लेती तो जो खुशियों कि बलि मैंने चढ़ा दी है न चढ़ती। वो दुःख न झेलना पड़ता। मैंने बहुत बार कोशिश की थी अपने आप को आगे बढ़ाने के लेकिन कभी-कभी परिस्थितियां विकृत हो जाती है। आदमी अपने फैसले और अपने सपनों को छोड़कर अपनी जरूरतों के पीछे भागने लगता है। मैं भी भागने लगी थी इसी कारण से आज मैं कुछ नहीं हूं और मुझे लगता है मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकती।
तभी स्वाति कमरे में टहलते हुए - मां मैं जानना चाहती हूं कि तुम्हारे क्या सपने थे जो मुझे कभी बताया नहीं तुमने? बस यूं ही चक्की की तरह पिस्ते रही। वो सपने जो तुमने अपने तक ही सीमित रखा मुझे तक न बताया। क्या तुम उस बारे में बता सकती हो हमें? हां मेरी बच्ची क्यों नहीं? मेरी जिंदगी तो खुली किताब है लेकिन शायद वो सपना ही मुझे बर्बाद करके छोड़ा। मैं हमेशा से चाहती थी कि मैं एक अच्छी लेखिका बनूं, इसीलिए बहुत सारी कविताएं-कहानियां लिखी। जब मैंने तुम्हारे बाप को भी छोड़ा था। उसके बाद भी मुझे उतना ही गूरूर था। मुझे ना जाने कितने लोगों के चक्कर काटने पड़े publisher के, बहुत लोगों से कहा, लेकिन उनलोगों ने भी मुझसे कहानियां और कविताएं छपवाने के भी मुझसे पैसे मांगने लगे मुझे समझ में ही नहीं आता था। यहां तो खाने के पैसे नहीं है और कविताओं को छपवाने के लिए कहां से पैसा लाती। इसलिए छोटी-मोटी नौकरी करने लगी। यही कारण था कि तुम्में भी literature का गुण था। शायद मेरे ही कारण आया हो लेकिन मैंने तुम्हें उसको आगे नहीं बढ़ाने दिया। मुझे लगा इसमें कुछ नहीं है इसलिए मैंने तुम्हें मैनेजमेंट का कोर्स करवाया था ताकी तुम किसी भी कंपनी में अच्छे पद पर काम कर सको या हो सके तो काम से जी उचट जाए या तो मायूस हो जाओ तो तुम अपना बिजनेस भी अपने ही पैसे से खड़ा कर सको। ऐसा नहीं था कि मेरे पास पैसे नहीं थे कभी-कभी तो इतने पैसे आए थे मैंने तो अपने कविता की एक किताब भी छपवा आई थी पर वो उतना famous ना हो सका। सारे पैसे उसी में डूब गए थे, जब तुम थोड़ी बच्ची थी। अब तो कुछ समझ में नहीं आता। तभी स्वाति - मां तुम कहानियां और कविताएं लिखती थी या अभी भी तुम लिख सकती हो? मां जरा वह अपने पुरानी कहानियां और कविताएं दिखाना तो। क्यों? तुम्हें क्या लगता है? उससे क्या होगा? इससे बहुत कुछ हो सकता है। तुम्हें नहीं पता, पर मुझे सब पता है। क्या? क्या कहना चाहती हो तुम? तुम्हें नहीं पता? तुम्हें सब पता है। मैं समझ नहीं पा रही हूं। तभी स्वाति मुस्कुराते हुए और अपनी मां को जोर से गले लगा लेती है और कहती है मां मैं आज की लड़की हूं और मैं हम दोनों मिलकर इस चीजों को बदल सकते हैं। हां मैं तुम्हारे साथ हूं पर कैसे?
स्वाति जल्दी से अपना लैपटॉप अपने रूम से ले आती है। मां हम लोग अपना यूट्यूब चैनल खोल सकते हैं। उस पर मैं तुम्हारी कहानियां और कविताएं डालूंगी। मैंने मैनेजमेंट का कोर्स किया है। तुम्हें पता है, एक बार मैं कहती थी कि मैं फिल्म एडिटिंग के लिए कोर्स करना चाहती हूं और तुम ने मुझे मना कर दिया था फिर भी मैं अपने दोस्त के पास जाकर कुछ न कुछ सीखते रहती थी। मुझे कुछ एनिमेशन भी बनाने आते हैं। क्यों ना हम लोग ट्राई करें और तुम्हारी कहानियां, तुम्हारी कविताएं उस एनिमेशन के थ्रू डालें? लेकिन इसमें खर्चा कितना आएगा? कोई खर्चा नहीं है मां, इसमें कोई खर्चा नहीं है। बस तुम्हारा ज्ञान और मेरी skill हम दोनों मिलकर कुछ अच्छा कर सकते हैं। यह अच्छा होगा। आज ही मुझे विकास कह रहा था कि तुम मैनेजमेंट की student हो कुछ लगाओ दिमाग। अब मुझे लगता है अब मैं यही करूंगी। स्वाति बहुत खुश हो जाती है उसकी मां को ज्यादा कुछ समझ में नहीं आता। बस उसे लगता है कि मेरी बेटी सही कह रही है। वह अपने सारे पुराने डायरी को उसके सामने खोल कर रख देती है। सुहाना एक-एक कहानी पढ़-पढ़ कर और एक-एक शब्द पर अपनी मां को चूमने लगती है बोलती है। वाह मां! तूने कितना अच्छा लिखा है। यह बहुत अच्छा है। शायद, शायद तुम जिन लोगों के पास गई थी उन लोगों में इतनी समझ ही नहीं थी कि वे लोग इन कहानियां और कविताओं को समझ पाते। वह सारी कविताएं और कहानियों को YouTube, blog और Facebook पर चलाती है। देखते ही देखते हैं उसके followers, viewers और subscribers इतने बढ़ जाते हैं कि पैसे आते नहीं है पैसों की बारिश होती है। उसकी मां का आत्मस्वाभिमान फिर से वापस लाती है उसकी बेटी, जो मां कहीं टूट के बिखर जाती आज वह मजबूती के साथ खड़ा कर देती है स्वाति। स्वाति बहुत संतुष्ट है अपने जीवन में। तभी उसकी मां उसके कमरे के पास आकर उसका दरवाजा खटखटाती है। स्वाति - क्या हुआ मां? मैं कुछ काम कर रही थी बोलो कुछ काम है? नहीं-नहीं मेरी बच्ची कोई काम नहीं है। बस यूं ही प्रेस वाले फोन कर रहे थे। वह एक इंटरव्यू लेना चाहते हैं।
स्वाति खुशी से उछल पड़ती है - Wow that’s a great news. खुशी की बात है ये काम तो हम लोग को पहले ही कर लेना चाहिए था। तुमने क्या कहा? मैंने अभी कुछ कहा नहीं है। बस मैंने कहा कि मैं सोच कर बताती हूं। ओहो! इसमें सोचने वाली क्या बात है बस हमें हां कहने की जरूरत है। अब तो तुम टीवी चैनलों पर भी दिखने लगोगी। उसकी मां की आंखें छलक जाती है और अपनी बेटी को मासूमियत भरी नजरों से देखती है। स्वाति अपनी मां के करीब आकर - क्या हुआ? तुम क्यों दुखी हो? आज भी दुखी हो? अब तुम्हारे पास पैसे हैं सब कुछ है और मेरे सपने पूरे हो रहे हैं और मैं ऐसा काम करना चाहती थी जो मेरा काम हो तो फिर आज तुम क्यों दुःखी हो और आज हमारे पास इतने पैसे हैं कि अगर मैं कोई भी बिजनेस स्टार्ट करना चाहूं तो वह खड़ा कर सकती हूं। उसकी मां कहती है - नहीं मेरे बच्ची यह खुशी के आंसू है। मुझे किसी चीज का गम नहीं है। आज मुझे एहसास होता है कि जिंदगी का सबसे बड़ा पड़ाव है शादी, अगर मैं शादी नहीं करती तो तू मेरी जिंदगी में नहीं होती। शायद मैं टूट कर कहीं बिखर जाती लेकिन जब मैं आज टूट रही थी तब तुमने मुझे संभाला कभी-कभी मुझे एहसास होता है कि तुम मेरी बेटी ही नहीं हो, मेरी मां भी हो। स्वाति अपनी मां को गले लगा लेती है।
स्वाति चली जाती है। तभी उसकी मां अधेड़बून में आगे बढ़ते हुए अपने कमरे में जाती है अपना पर्स उठाती है सोचती है क्या मिला मुझे? स्वाति के चलते ही तो उसके पिता से मैंने रिश्ता तोड़ा था लेकिन लगता है आज फिर उससे एक बार रिश्ता जोड़ लूं। क्या मुझे उस आदमी को माफ कर देना चाहिए जो मुझे छोड़कर किसी और के साथ रह रहा है? आज तक तो मेरी खबर नहीं ली। मुझे भी कितना गुरूर था मैं नौकरी करती हूं। मुझे क्या जरूरत है ऐसे इंसान की लेकिन अब वक्त बदल गया है स्वाति बड़ी हो गई है। उसे अब पिता की जरूरत है मेरी भी नौकरी रिटायरमेंट के कगार पर आ गई है। पता नहीं मैं उसके लिए लड़का ढूंढ पाऊंगी या नहीं? उसके पापा रहते तो लोगों को अच्छे से समझ पाते, पुछते, पता करते पर मैं क्या करूंगी अकेली जान? छोड़ो रहने दो। लड़ाई-झगड़ा तो अपनी जगह पर है।
मुझे एक बार उन्हें फोन कर ही लेना चाहिए, फोन उठाती हैं और अपने पति को फोन लगाती हैं। फोन की घंटी बजती है और फोन उसका पति ना हो उठाकर उसकी सौतन उठाती है – हां! हेलो कौन? उसका तो जी ही जल जाता है। मैं बताऊं, मैं कौन हूं? कमीनी कहीं कि तुम्हें नहीं पता, मैं कौन हूं? लगता है नंबर भी सेव करके नहीं रखते मेरा। स्वाति की मां सोचती है क्या बोलूं मैं इसे? मैं कौन हूं? कुछ नहीं कहती है और फोन रख देती है। ऑफिस के लिए निकल जाती है स्वाति बहुत खुश है अपने लाइफ में। कॉलेज जाती है – विकास! विकास – हां! हेलो! स्वाति। बोलो कैसी हो? अरे यार! मम्मी का रिटायरमेंट होना है और वो चाहती है PG कंप्लीट करते-करते मैं कोई नौकरी कर लेती। मुझे भी लगता है, मां का हाथ बटाना चाहिए। कोई जॉब मिल जाती तो अच्छा रहता। अरे यार मैंने तो तुम्हें 100 काम बताया 50 तो तुमने बिना देखे ही रिजेक्ट कर दिया और 50 को तुमने जाते ही ना कर दिया। मुझे नहीं लगता कोई काम तुम्हारे लिए बना है, तुम्हें जो ठीक लगता है करो। यार मैं मैनेजमेंट की स्टूडेंट हूं इसलिए मुझे उस तरह के काम पसंद नहीं आते। यार तू अपना कोई बिजनेस क्यों नहीं कर लेती? बिजनेस; हां सोचती तो हूं।
मैं अकेली हूं, तो वह काम नहीं कर सकती। पापा होते या कोई भाई होता; पता नहीं क्या-क्या मां बोलती है? पता नहीं लोग लड़कियों को इतना कमजोर क्यों समझते हैं। विकास मुस्कुराता हुआ स्वाति से कहता है - वाह! तुम्हारी मम्मी तुम्हें लड़की भी समझती है? यह तो मुझे अजीब बात लगती है। तुम्में तो कोई लड़कियों वाली बात ही नहीं है। अच्छा रहने दे। काश! मेरी मां के थॉट भी तुम्हारे जैसे होते तो मुझे इतना सुनना नहीं पड़ता। अच्छा! ओ! हो! तो चलो तुम्हारी मां के अंदर मैं अपना थॉट डाल देता हूं। कभी घर तो बुलाया करो। अच्छा तुम घर पर आओगे तो मेरी मां सोचेंगी कि मेरा टांका तुमसे भिड़ गया है और वह तो खुशी से नाचने लगेगी, बोलेगी काम धंधा छोड़ो इसे से शादी कर लो। मैं इन सब झंझटों में नहीं पड़ती मुझे लाइफ में आगे बढ़ना है। कुछ काम करना है। अच्छा तो शादी कोई काम नहीं है? होगा; पर मेरे लिए नहीं है। शादी एक पड़ाव है जिसे हर किसी को पार करना होता है। अच्छा; तो वह लड़की स्वाति नहीं है? नहीं-नहीं वह मैं हूं पर मुझे अभी उस पड़ाव को पार करने की जरूरत नहीं है। ऐसे मेरा तो शादी से जी ही उचट गया है। क्यों? तुमने देखा नहीं; पापा ने मां के साथ कितना गलत किया? छोड़ो यार रहने दो पुरानी बातों को। हां-हां है तो पुरानी बातें। आज मां कह रही थी। मैंने कभी उनको इतना कमजोर नहीं देखा, जितना आज। देखा मैंने मां को। कितनी दुःखी थी? बोल रही थी काश! तुम्हारे पापा होते। एक पति के बिना जिंदगी बिताना अलग बात है पर एक बाप के बिना लड़की का जिंदगी बिताना एक अलग बात है। पता नहीं क्यों वह अपने आप को इतना असहाय महसूस कर रही थी। मुझे समझ में नहीं आया मैंने क्या ऐसे गलती कर दी है जिसके कारण उन्हें ऐसा लगता है। नहीं-नहीं ऐसी बात नहीं है जिंदगी में कभी-कभी ऐसे पल आते हैं जब आदमी अपने फैसलों पर ही शक करने लगता है। उन्होंने जो किया वह सही था लेकिन तुम्हारे कारण या समाज के कारण उन्हें ऐसा लगता होगा कि काश तुम्हारे पापा होते तो अच्छा होता। वह है भी और नहीं भी। हां यह बात तो सही है मुझे कभी-कभी लगता है; मां दूसरी शादी कर लेती तो अच्छा होता। लेकिन उन्होंने मेरे कारण कभी दूसरी शादी नहीं की शायद कर ही लेना चाहिए था। मेरे ही कारण। आज अगर वो एक दूसरी शादी कर लेती तो शायद उनकी जिंदगी भी संवर जाती और आज जो डर है उनके अंदर वह ना होता मुझे लेकर; इसका कोई बाप नहीं है रहने दो सोतेला ही होता। सौतेला और अपना क्या होता है यार, अपने ही लोग तो पीठ में छुरा भोकते हैं दूसरों का क्या? मेरे पापा की जगह मेरे सौतेले बाप ने की होती तो मेरा भी मन संतुष्ट होता, लगता हां चलो ठीक है, मेरा तो बाप था नहीं इसलिए मेरे साथ ऐसा किया और देखो मेरा अपना बाप होके उसने मेरी तरफ कभी देखा नहीं। ऐसे इंसान से क्या उम्मीद करना कि वह मेरे जीवन में कुछ आगे कर सकते मुझे लगता है मेरे सपनों को लेकर। तुम तो जानते ही हो कितनी पढ़ी लिखी थी फिर भी कोई ढंग की नौकरी तो हुई नहीं प्राइवेट जॉब करती हैं उसमें भी मेरा खर्चा, घर का खर्चा, सब कुछ चलाती हैं। उसमें से कहां पैसा बचता है जो मुझे कुछ दे सके। पता नहीं बोल रही थी रिटायर हो रही हैं सरकारी नौकरी होती तो कुछ पैसे भी मिलते। ये प्राइवेट वाले ना बस देख लेते हैं, उम्र ढल गई है, अब क्या जरूरत है? बस निकालने के पीछे पड़ जाते हैं।
रिटायरमेंट क्या है? मां तो कितना अच्छा काम करती है, कोई मिल गई होगी सस्ते-सुस्ती में काम करने वाली। रहने दो मुझे कुछ करना होगा उनके लिए। विकास - तुम ठीक कहती हो यार, लेकिन तुम्हारी मां का एक्सपीरियंस भी तो काउंट होगा। वह कहीं कुछ और कर सकती हैं। क्या करेंगी? मुझे कुछ समझ में नहीं आता। तुम मैनेजमेंट कि स्टूडेंट हो, तुम्हें समझ में नहीं आता; कुछ सोचो उनके लिए। तुम्हारी मां है तुमने देखा है उन्हें अपनी जिंदगी में संघर्ष करते हुए, उन्हें तुम जानती हो वह क्या कर सकती हैं; क्या नहीं कर सकती हैं। यही तो मैनेजमेंट स्किल है। एक अच्छा मैनेजमेंट गुरु वही होता है जो आम आदमी से भी काम करवा ले। हां! हां! हां! तुम्हारी बकवास बातें मेरी समझ से परे हैं। कोई ढंग का काम मिलता है तो बोलो नहीं तो मुझे क्लास के लिए लेट हो रहा है। ओके यार मैं देखता हूं। सारी बातें खत्म होते ही स्वाति अपना क्लास करने के लिए अपने क्लास रूम में चली जाती है। क्लास रूम में क्लास चलते रहती है लेकिन उसका दिल नहीं लगता। वह सोचती है मां कितनी दुःखी थी आज, पता नहीं क्यों इतनी दुःखी थी? शायद उनके दुख का कारण मैं तो नहीं? हां, शायद मैं ही हूं। मैं क्या करूं उनके लिए? यही सोचते-सोचते क्लास खत्म हो जाती है और स्वाति घर आते-आते सोचते रहती हैं मैं क्या करूं? मैं क्या करूं ऐसा जो उनके लिए अच्छा हो?
स्वाति घर पहुंचती हैं। मां! ओह! मेरी बच्ची तुम आ गई? हां! मैं आ गई। क्या बोलूं आज ही उन्होंने मुझे निकाल दिया। बोला अब आप इतना अच्छे से काम नहीं कर पाती हैं जितना पहले करती थी, शायद मेरी आंखें कमजोर हो गई है इसलिए उन्होंने मुझे निकाल दिया है; है तो कितना भी प्राइवेट जॉब ना! क्या करूं समझ में नहीं आ रहा, लेकिन हम कुछ कर लेंगे तुम ज्यादा चिंता मत करो। तुम्हारी नौकरी का क्या हुआ, नौकरी के बारे में कुछ पता चला? ऊफ मां! कुछ खास तो पता नहीं चला है अभी मुझे, लेकिन तुम कुछ चिंता मत करो। कुछ दिनों में मैं कोई ना कोई नौकरी ढूंढ ही लूंगी। विकास ने तुम्हें कितनी बार नौकरी के लिए भेजा था। मैं कितना समझाते रहती थी, तुमने सुना नहीं कभी मेरी बात को। रहने दो मेरी बच्ची मैं कुछ कर लूंगी तुम ज्यादा चिंता मत करना। हां-हां हम दोनों मिलकर कर लेंगे। स्वाति की मां - मैं तुमसे कुछ बात करना चाहती थी। हां! बोलो ना! क्यों ना हम तुम्हारे पापा से बात करें? शायद वो तुम्हारे लिए कुछ देख सकते हैं, अच्छी नौकरी है उनकी। मैंने ही अपने गुरुर में उन्हें छोड़ दिया था, उन्हें न छोड़ती तो शायद हमारी जिंदगी इतनी खराब ना होती। शायद मुझे कुछ ज्यादा ही घमंड था उस समय लेकिन अब नहीं रहा। वक्त ने धीरे-धीरे मुझे इतना बदल दिया है।
मैं कभी सोचती भी नहीं थी, तुम 6 साल की थी, जब मुझे पता चला कि उनका चक्कर किसी और के साथ है। कितनी दुःखी हुई थी मैं? पता नहीं उस समय मुझे क्या सवार हो गया था जब उस ड्रॉर में मैंने उस औरत की फोटो देखी थी और मैंने उनसे इतना झगड़ा किया था। मैंने उनसे अलग होते हुए एक बार भी नहीं सोचा कि तुम्हारा क्या होगा? बस यही सोचा था इस आदमी से दूर चले जाना ही मेरे लिए सबसे अच्छी चीज है लेकिन आज एहसास होता है कि वो डिसीजन अगर थोड़ा सोच-समझकर कर लेती तो आज हम लोग यूं गुरबत भरी जिंदगी ना जीते होते। तुमने बहुत कुछ कंपरमाइज किया है मेरे कारण। तभी स्वाति - नहीं मां! तुमने जो किया ठीक किया तुम्हारी सिर्फ एक गलती मानती हूं जो आज भी मुझे लगता है। क्या मेरे बच्ची? अगर तुम शादी कर लेती तो ज्यादा अच्छा होता।
मां तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए थी, अगर तुम शादी कर लेती तो आज तुम अपने फैसले पर अफ़सोस ना करती होती। तुमने अपनी लाइफ में बहुत कुछ खोया है अलग बात है कि तुम्हें उसे खोने का एहसास नहीं है। वह रंगीन शामें वह खुशियां जो तुम्हें तुम्हारे पति से मिलती। वह कभी ना मिला। हमेशा दुःख और दुःख ही तुम्हारे जीवन का एक आसरा बन के रह गया। तुम्हें नहीं लगता कि तुम वह सब कुछ deserve करती थी, जो एक लड़की deserve करती है। उस समय तुम्हारी उम्र क्या थी तुम कितनी टैलेंटेड थी, इतनी पढ़ी-लिखी लेकिन अपने लाइफ में आगे ना बढ़ सकी। तुम्हारे ऊपर मेरा भार था। तुमने मुझे अपने से पहले देखा तभी मुझे अच्छे स्कूल में पढ़ाया-लिखाया और आज मैं एमबीए कर रही हूं। तुमने मुझे वह हर चीज दी, जो मुझे मेरा बाप नहीं दे पाता। वह आज़ादी, फ्रीडम तुमने मुझे दिया है वह मुझे कोई नहीं दे पाता मुझे। एक चीज का अफसोस है कि तुमने अपनी जिंदगी यूं ही बर्बाद कर दी। मुझे याद आता है वह लम्हा जब कभी तुम अकेले बैठ कर रोती थी, लेकिन नहीं जिससे तुम आज भी, तुम चाहती हो कि ठीक हो जाए।
तुम्हारा गुरूर, तुम्हारा घमंड, मुझे आज इतना मजबूत बनाता है। इस चीज को छोड़ दिया तो मेरी जिंदगी का आधार ही खत्म हो जाएगा। मेरा अस्तित्व खत्म हो जाएगा। स्वाति की मां की आंखें छलक उठती है। बोलती है नहीं बच्ची मैं थोड़ी, मुझे थोड़ी-सी कमजोरी महसूस हुई थी। मैं डर गई थी, तुम्हारे कारण कि कहीं मैंने कोई गलत फैसला तो नहीं ले लिया जिसके कारण आज मेरी बच्ची का भविष्य कहीं खत्म तो नहीं हो रहा है, लेकिन तुम जो बातें कह रही हो उससे मुझे आज एहसास होता है कि नहीं मैं वापस तो नहीं जाऊंगी। अगर तुम्हें लगता है मेरे वापस जाने से तुम्हारा, तुम्हारे अंदर का जो अस्तित्व जो खत्म हो रहा है तो मुझे नहीं लगता कि मैं तुम्हारे लिए उस इंसान से अलग हुई थी। मैं नहीं चाहती थी कि अपने पिता को यूं बटते हुए देखों, मेरी इच्छाओं को मरते हुए देखो क्योंकि आदमी अपने पति से दूर रहके के तो अपनी जिंदगी व्यतीत कर सकता है लेकिन अपनी सौतन के साथ रहकर कभी खुशियों में भागीदारी नहीं ले सकता है। खुशी क्या है? खुशी क्या है मेरी बच्ची? खुशी तो वह है जो मन को प्रफुल्लित करें। खुशी वो नहीं जो हमें पैसों से मिलती है। पैसा क्या है? पैसा तो हर कोई कमा लेता है। मैं भी कभी जिंदगी में सोचती थी मैं कुछ करूंगी, कुछ बेहतर करूंगी। मैं इतने पैसे कमाऊंगी कि तुम्हारा बाप कभी कमा नहीं पाएगा। इतनी शोहरत होगी मेरे कदमों में जितना तुम्हारे बाप को कभी मिल नहीं सकती। हां! 'पर मैंने कुछ खोया है उम्मीदों के चक्कर में बहुत कुछ खोया है, तुम्हें बनाने के चक्कर में।' मुझे समझ में नहीं आता था कि मैं क्या करूं? मैंने बहुत बार आगे बढ़ने की कोशिश की पर बहुत बार मुझे अपने कदम पीछे लेने पड़े है क्योंकि जिंदगी में हर चीज आसानी से नहीं मिलती। मैंने बहुत बार अपने आप को संवारने के चक्कर में खुद को टूटते हुए देखा है इसीलिए आज मैं इतनी नाराज खुद से।
मैं तुमसे नाराज नहीं हूं ना मैं अपने उस decision से नाराज हूं लेकिन हां क्योंकि मैं कामयाब नहीं हूं तो मैं अपने आप से नाराज हूं, इसलिए आज मेरा घमंड भी टूट रहा है। मेरे अंदर जो कुछ भी था वह ढ़ह रहा है, जैसे सर्द दीवारों में, जैसे सर्द दीवारों की ताकत कमजोर हो जाती है और एक हल्का-सा झटका उसे तोड़ जाता है उसी तरीके से मुझे तोड़ दिया है। उसी तरीके से इस नौकरी ने मुझे तोड़ दिया है और मुझे उल्टी-सीधी चीजें सोचने पर मजबूर कर दिया है। तुम ठीक कहती हो हम दोनों मिलकर कुछ अच्छा कर सकते हैं। मैंने गलती कर दी मैंने अपने गूरूर में गलती कर दी। मैंने शादी नहीं की। मुझे कर लेनी चाहिए थी शादी ताकि मैं अपनी खुशियों के साथ-साथ तुम्हारी खुशियों की बलि न चढ़ाती। तुम्हें भी एक बाप का प्यार मिलता। तुम ठीक कहती हो, हर इंसान को आगे बढ़ाने का हक है तो उसे वह हर चीज़ की खुशी महसूस करने की। जब कोई आपका पार्टनर आपको धोखा देता है और वह यह सोचता है कि आप अकेली लड़की है आप आगे क्या कीजिएगा बहुत तो यही होगा तालाक दीजिएगा। लेकिन शायद अगर मैं शादी कर लेती तो जो खुशियों कि बलि मैंने चढ़ा दी है न चढ़ती। वो दुःख न झेलना पड़ता। मैंने बहुत बार कोशिश की थी अपने आप को आगे बढ़ाने के लेकिन कभी-कभी परिस्थितियां विकृत हो जाती है। आदमी अपने फैसले और अपने सपनों को छोड़कर अपनी जरूरतों के पीछे भागने लगता है। मैं भी भागने लगी थी इसी कारण से आज मैं कुछ नहीं हूं और मुझे लगता है मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकती।
तभी स्वाति कमरे में टहलते हुए - मां मैं जानना चाहती हूं कि तुम्हारे क्या सपने थे जो मुझे कभी बताया नहीं तुमने? बस यूं ही चक्की की तरह पिस्ते रही। वो सपने जो तुमने अपने तक ही सीमित रखा मुझे तक न बताया। क्या तुम उस बारे में बता सकती हो हमें? हां मेरी बच्ची क्यों नहीं? मेरी जिंदगी तो खुली किताब है लेकिन शायद वो सपना ही मुझे बर्बाद करके छोड़ा। मैं हमेशा से चाहती थी कि मैं एक अच्छी लेखिका बनूं, इसीलिए बहुत सारी कविताएं-कहानियां लिखी। जब मैंने तुम्हारे बाप को भी छोड़ा था। उसके बाद भी मुझे उतना ही गूरूर था। मुझे ना जाने कितने लोगों के चक्कर काटने पड़े publisher के, बहुत लोगों से कहा, लेकिन उनलोगों ने भी मुझसे कहानियां और कविताएं छपवाने के भी मुझसे पैसे मांगने लगे मुझे समझ में ही नहीं आता था। यहां तो खाने के पैसे नहीं है और कविताओं को छपवाने के लिए कहां से पैसा लाती। इसलिए छोटी-मोटी नौकरी करने लगी। यही कारण था कि तुम्में भी literature का गुण था। शायद मेरे ही कारण आया हो लेकिन मैंने तुम्हें उसको आगे नहीं बढ़ाने दिया। मुझे लगा इसमें कुछ नहीं है इसलिए मैंने तुम्हें मैनेजमेंट का कोर्स करवाया था ताकी तुम किसी भी कंपनी में अच्छे पद पर काम कर सको या हो सके तो काम से जी उचट जाए या तो मायूस हो जाओ तो तुम अपना बिजनेस भी अपने ही पैसे से खड़ा कर सको। ऐसा नहीं था कि मेरे पास पैसे नहीं थे कभी-कभी तो इतने पैसे आए थे मैंने तो अपने कविता की एक किताब भी छपवा आई थी पर वो उतना famous ना हो सका। सारे पैसे उसी में डूब गए थे, जब तुम थोड़ी बच्ची थी। अब तो कुछ समझ में नहीं आता। तभी स्वाति - मां तुम कहानियां और कविताएं लिखती थी या अभी भी तुम लिख सकती हो? मां जरा वह अपने पुरानी कहानियां और कविताएं दिखाना तो। क्यों? तुम्हें क्या लगता है? उससे क्या होगा? इससे बहुत कुछ हो सकता है। तुम्हें नहीं पता, पर मुझे सब पता है। क्या? क्या कहना चाहती हो तुम? तुम्हें नहीं पता? तुम्हें सब पता है। मैं समझ नहीं पा रही हूं। तभी स्वाति मुस्कुराते हुए और अपनी मां को जोर से गले लगा लेती है और कहती है मां मैं आज की लड़की हूं और मैं हम दोनों मिलकर इस चीजों को बदल सकते हैं। हां मैं तुम्हारे साथ हूं पर कैसे?
स्वाति जल्दी से अपना लैपटॉप अपने रूम से ले आती है। मां हम लोग अपना यूट्यूब चैनल खोल सकते हैं। उस पर मैं तुम्हारी कहानियां और कविताएं डालूंगी। मैंने मैनेजमेंट का कोर्स किया है। तुम्हें पता है, एक बार मैं कहती थी कि मैं फिल्म एडिटिंग के लिए कोर्स करना चाहती हूं और तुम ने मुझे मना कर दिया था फिर भी मैं अपने दोस्त के पास जाकर कुछ न कुछ सीखते रहती थी। मुझे कुछ एनिमेशन भी बनाने आते हैं। क्यों ना हम लोग ट्राई करें और तुम्हारी कहानियां, तुम्हारी कविताएं उस एनिमेशन के थ्रू डालें? लेकिन इसमें खर्चा कितना आएगा? कोई खर्चा नहीं है मां, इसमें कोई खर्चा नहीं है। बस तुम्हारा ज्ञान और मेरी skill हम दोनों मिलकर कुछ अच्छा कर सकते हैं। यह अच्छा होगा। आज ही मुझे विकास कह रहा था कि तुम मैनेजमेंट की student हो कुछ लगाओ दिमाग। अब मुझे लगता है अब मैं यही करूंगी। स्वाति बहुत खुश हो जाती है उसकी मां को ज्यादा कुछ समझ में नहीं आता। बस उसे लगता है कि मेरी बेटी सही कह रही है। वह अपने सारे पुराने डायरी को उसके सामने खोल कर रख देती है। सुहाना एक-एक कहानी पढ़-पढ़ कर और एक-एक शब्द पर अपनी मां को चूमने लगती है बोलती है। वाह मां! तूने कितना अच्छा लिखा है। यह बहुत अच्छा है। शायद, शायद तुम जिन लोगों के पास गई थी उन लोगों में इतनी समझ ही नहीं थी कि वे लोग इन कहानियां और कविताओं को समझ पाते। वह सारी कविताएं और कहानियों को YouTube, blog और Facebook पर चलाती है। देखते ही देखते हैं उसके followers, viewers और subscribers इतने बढ़ जाते हैं कि पैसे आते नहीं है पैसों की बारिश होती है। उसकी मां का आत्मस्वाभिमान फिर से वापस लाती है उसकी बेटी, जो मां कहीं टूट के बिखर जाती आज वह मजबूती के साथ खड़ा कर देती है स्वाति। स्वाति बहुत संतुष्ट है अपने जीवन में। तभी उसकी मां उसके कमरे के पास आकर उसका दरवाजा खटखटाती है। स्वाति - क्या हुआ मां? मैं कुछ काम कर रही थी बोलो कुछ काम है? नहीं-नहीं मेरी बच्ची कोई काम नहीं है। बस यूं ही प्रेस वाले फोन कर रहे थे। वह एक इंटरव्यू लेना चाहते हैं।
स्वाति खुशी से उछल पड़ती है - Wow that’s a great news. खुशी की बात है ये काम तो हम लोग को पहले ही कर लेना चाहिए था। तुमने क्या कहा? मैंने अभी कुछ कहा नहीं है। बस मैंने कहा कि मैं सोच कर बताती हूं। ओहो! इसमें सोचने वाली क्या बात है बस हमें हां कहने की जरूरत है। अब तो तुम टीवी चैनलों पर भी दिखने लगोगी। उसकी मां की आंखें छलक जाती है और अपनी बेटी को मासूमियत भरी नजरों से देखती है। स्वाति अपनी मां के करीब आकर - क्या हुआ? तुम क्यों दुखी हो? आज भी दुखी हो? अब तुम्हारे पास पैसे हैं सब कुछ है और मेरे सपने पूरे हो रहे हैं और मैं ऐसा काम करना चाहती थी जो मेरा काम हो तो फिर आज तुम क्यों दुःखी हो और आज हमारे पास इतने पैसे हैं कि अगर मैं कोई भी बिजनेस स्टार्ट करना चाहूं तो वह खड़ा कर सकती हूं। उसकी मां कहती है - नहीं मेरे बच्ची यह खुशी के आंसू है। मुझे किसी चीज का गम नहीं है। आज मुझे एहसास होता है कि जिंदगी का सबसे बड़ा पड़ाव है शादी, अगर मैं शादी नहीं करती तो तू मेरी जिंदगी में नहीं होती। शायद मैं टूट कर कहीं बिखर जाती लेकिन जब मैं आज टूट रही थी तब तुमने मुझे संभाला कभी-कभी मुझे एहसास होता है कि तुम मेरी बेटी ही नहीं हो, मेरी मां भी हो। स्वाति अपनी मां को गले लगा लेती है।
It's a awesome story. I love about the thought of writer.
ReplyDeleteआज की समाज में नयी पीढ़ी पुरानी पीढ़ी के सपने पूरा नहीं करती है ऐसे में ये कहानी समाज को एक नया संदेश देती है। माँ को बेटी से ज्यादा कोई नहीं जान सकता, जब बेटी अपनी माँ को सही मायने में पहचानती तो माये ऐसी ही बुलन्दी को छूती है। हर पीढ़ी के लिए यह आदर्श कहानी है, यह दुनिया की महिला के दुख सूख को प्रस्तुत करती है। अपने बच्चों के लिए अपने ही सपने सिर्फ माँ ही त्याग सकती है।
ReplyDeleteबहुत सुंदर कहानी है जिसमें लेखिका ने आधुनिक शिक्षा और डिजिटल क्रांति कैसे एक गुमनाम ब्यक्ति के जीवन को बदल सकता है। विवाह दो परिवार और दो इंसान के बीच एक समझौता है ।
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