राही और रास्ता
यूँ घूरती है तुम्हारी नज़रे मुझको
मेरे होने का एहसास होता है
दूसरो कि नज़रे यूँ घूरती है तुमको
तुम्हें खोने का एहसास होता है।
तब तुम मुझे एहसास दिलाते हो
मैं क्या हूँ तुम्हारे लिए
जीवन सार्थक लगता है, तुम्हारे कारण
तब दूसरे एहसास दिलाते है
मैं कुछ नहीं, तुम सबकुछ हो।
मेरा अस्तित्व कुछ नहीं
तुम्हारे बगैर
जैसे तारों का अस्तित्व नहीं है
रात के बगैर
जैसे दिये का अस्तित्व नहीं है
बात्ति बगैर।
मैं खुद को ढूंढने लगती हूँ तुम्में
तब तुम मुझे बताते हो
तुम सूरज हो
दिन का अस्तित्व नहीं, तुम्हारे बगैर
तुम चाँद हो
रात कि खुबसुरती नहीं, तुम्हारे बगैर।
तुम फूलों से ज़ुदा हो के भी
अपना अस्तित्व नहीं खोती
अपना महत्व नहीं खोती।
वो गुलशन को महकाते रहती है
वो दुलहन को रिझाते रहती है
वो महक हो तुम, जो अपना
अस्तित्व खो नही सकता
रुप बदल सकता है वो मगर
अपनी पहचान नही।
मैं फूल हूँ, तुम मकह हो
लोग मुझे देखकर आकर्षित हो सकते है
मगर, अगर तुम नही हो
तो वो मुझे अपना नही सकते।
मैं इतना सबकुछ हूँ तो
तुम क्या हो?
तब तुम मुझसे कहते हो
तुम खुद से पुछो मैं क्या हूँ?
तुम्हारे लिए
तब मेरी आत्मा जवाब देती है
वो समुंदर है, तुम मोती हो
उस भंवर से निकालकर
दुनिया को दे देता है।
वो सीप है, तुम मोती हो
जो अपना अस्तित्व खो कर भी
तुम्हारा अस्तित्व बनाता है।
लोग कहते है पति-पत्नी
गाड़ी के दो पहिए जैसे होते है
आज एहसास होता है कि
पति-पत्नी एक-दुसरे के
मार्गदर्शक होते है।
वह साथ-साथ चलते ही नहीं है
एक - दुजे़ को रास्ता भी दिखाते है
वह अपना ही जीवन नही
पूरे संसार के जीवन के
सही निर्माण का
उत्तरदायीत्व है उन पर।
इसलिए पति-पत्नी
एक-दुसरे के लिए
राही भी है और रास्ता भी।
मेरे होने का एहसास होता है
दूसरो कि नज़रे यूँ घूरती है तुमको
तुम्हें खोने का एहसास होता है।
तब तुम मुझे एहसास दिलाते हो
मैं क्या हूँ तुम्हारे लिए
जीवन सार्थक लगता है, तुम्हारे कारण
तब दूसरे एहसास दिलाते है
मैं कुछ नहीं, तुम सबकुछ हो।
मेरा अस्तित्व कुछ नहीं
तुम्हारे बगैर
जैसे तारों का अस्तित्व नहीं है
रात के बगैर
जैसे दिये का अस्तित्व नहीं है
बात्ति बगैर।
मैं खुद को ढूंढने लगती हूँ तुम्में
तब तुम मुझे बताते हो
तुम सूरज हो
दिन का अस्तित्व नहीं, तुम्हारे बगैर
तुम चाँद हो
रात कि खुबसुरती नहीं, तुम्हारे बगैर।
तुम फूलों से ज़ुदा हो के भी
अपना अस्तित्व नहीं खोती
अपना महत्व नहीं खोती।
वो गुलशन को महकाते रहती है
वो दुलहन को रिझाते रहती है
वो महक हो तुम, जो अपना
अस्तित्व खो नही सकता
रुप बदल सकता है वो मगर
अपनी पहचान नही।
मैं फूल हूँ, तुम मकह हो
लोग मुझे देखकर आकर्षित हो सकते है
मगर, अगर तुम नही हो
तो वो मुझे अपना नही सकते।
मैं इतना सबकुछ हूँ तो
तुम क्या हो?
तब तुम मुझसे कहते हो
तुम खुद से पुछो मैं क्या हूँ?
तुम्हारे लिए
तब मेरी आत्मा जवाब देती है
वो समुंदर है, तुम मोती हो
उस भंवर से निकालकर
दुनिया को दे देता है।
वो सीप है, तुम मोती हो
जो अपना अस्तित्व खो कर भी
तुम्हारा अस्तित्व बनाता है।
लोग कहते है पति-पत्नी
गाड़ी के दो पहिए जैसे होते है
आज एहसास होता है कि
पति-पत्नी एक-दुसरे के
मार्गदर्शक होते है।
वह साथ-साथ चलते ही नहीं है
एक - दुजे़ को रास्ता भी दिखाते है
वह अपना ही जीवन नही
पूरे संसार के जीवन के
सही निर्माण का
उत्तरदायीत्व है उन पर।
इसलिए पति-पत्नी
एक-दुसरे के लिए
राही भी है और रास्ता भी।
खूब सोच समझकर बनाये है कुदरत ने नर नारी।
ReplyDeleteएक के बिना दूसरा अधूरा कमाल की है कलाकारी
एक प्रेरणा है तो दूसरा प्रयत्न, छुए आसमान संग
जीवन आगे बढ़ता रहे पीढ़ी दर पीढ़ी चले दुनियादारी।
Ye story bahut accha h
ReplyDeleteThis is awesome poem for husband wife relation
ReplyDeleteNice story ji
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