रंगीन दुनिया

दुनिया में जितने रंग है
हर रंग उसके पास है
प्यार के जितने शब्द है
हर शब्द में वो खास है
हर दिन एक नया रंग
उसका सामने आता है
उसके हर रंग कि
मैं दिवानी हूँ
हर रोज़ मुझे
उससे प्यार हो जाता है
और हर रोज़ मेरा
उससे तलाक हो जाता है
वो मुझे रेत सा लगता है
मैं उसपे खुद को लिखती़
और खुद को मिटाती हूँ
वो हर रोज़ मुझको
ज़िने कि एक नयी पहचान देता है
वह उगता हुआ सुरज है
और मैं उसकी पहचान हूँ
रूके जीवन में गति दी है उसने
ये है मेरी सच्चाई
वह सागर है
और मैं हूँ उसकी गहराई
मैं तोड़ती हूँ
हर बंधन को
वो जोड़ता है एक
नया रिश्ता मुझसे
ये आधी-अधुरी ज़िंदगी
कब तक हम ज़ियेंगे
कब मिलेगा वो किनारा
जहाँ हमारा आशियाँ होगा|

Comments

  1. ईश्वर आपको जरूर ऐसा आशियां देगा जहां आपको किनारा मिलेगा। आपने काफ़ी प्रेरणादायक कविता लिखी है।

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